केंद्रीय कैबिनेट के 7 बड़े फैसले, सेमीकंडक्टर से मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तक योजनाओं को मंजूरी
नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रेलवे और उर्वरक क्षेत्र से जुड़े सात बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर कुल 2,19,353 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद मीडिया को दी।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने देश में तकनीकी निर्माण क्षमता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें सेमीकॉन 2.0, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) और यूरिया-2026 के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी जैसे अहम प्रस्ताव शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
कैबिनेट के फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक सेमीकंडक्टर सेक्टर को लेकर है। सरकार ने सेमीकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य भारत में चिप निर्माण को बढ़ावा देना और देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाना है।
सेमीकंडक्टर आज इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए बेहद जरूरी हैं। सरकार लंबे समय से भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए योजनाओं पर काम कर रही है।
इस योजना से देश में नए निवेश आने, रोजगार के अवसर बढ़ने और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार
कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन उत्पादन को और बढ़ावा देना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत स्मार्टफोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश में मोबाइल फोन का उत्पादन और निर्यात लगातार बढ़ा है। सरकार की नई योजना से मोबाइल निर्माण कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू उत्पादन क्षमता में विस्तार होगा।
भारत पहले ही दुनिया के बड़े मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में शामिल हो चुका है। इस योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात को भी मजबूत करना है।
उर्वरक क्षेत्र में भी बड़ा फैसला
कैबिनेट ने यूरिया-2026 के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में उर्वरक उत्पादन क्षमता बढ़ाना और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना है।
भारत में कृषि क्षेत्र के लिए यूरिया बेहद महत्वपूर्ण उर्वरक है। सरकार का प्रयास है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम की जाए। इस फैसले से उर्वरक क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी
कैबिनेट ने रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और देश की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
रेलवे परियोजनाओं के विस्तार से माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और यात्री सुविधाओं में सुधार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती
केंद्रीय सरकार के अनुसार, इन फैसलों का उद्देश्य भारत को उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। सेमीकंडक्टर, मोबाइल निर्माण और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलेगी।
सरकार लगातार मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। नई योजनाओं को इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सात फैसलों का कुल प्रभाव
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए सात बड़े फैसलों में तकनीक, उद्योग, कृषि और परिवहन क्षेत्रों को शामिल किया गया है। कुल 2.19 लाख करोड़ रुपये के इस पैकेज से देश की अर्थव्यवस्था को गति देने, रोजगार बढ़ाने और उत्पादन क्षमता मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार के ये फैसले आने वाले वर्षों में भारत की औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से देश में निवेश बढ़ेगा और भारत वैश्विक स्तर पर निर्माण क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।