Zepto MRP Case: ऑनलाइन शॉपिंग और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। आजकल लोग घर बैठे कुछ ही मिनटों में किराने का सामान, फल-सब्जियां और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें मंगवा रहे हैं। लेकिन कई बार ग्राहक सामान की वास्तविक कीमत और ऑनलाइन दिखाए गए डिस्काउंट पर ध्यान नहीं देते। इसी बीच क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म जेप्टो (Zepto) से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूलने पर उपभोक्ता आयोग ने कंपनी के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया है। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने जेप्टो को कुल 57 हजार रुपये का भुगतान और जमा करने का आदेश दिया है। यह मामला ग्राहकों के अधिकारों और ऑनलाइन खरीदारी में कीमतों की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
34 रुपये ज्यादा वसूलने पर जेप्टो को लगा 57 हजार का झटका
यह मामला हैदराबाद के उप्पल निवासी 35 वर्षीय अधिवक्ता के. शिव गणेश से जुड़ा है। उन्होंने 28 सितंबर 2023 को जेप्टो के माध्यम से किराने का सामान ऑर्डर किया था। उनके ऑर्डर में कटहल और एमटीआर थ्री मिनट पोहा शामिल था।
ऑर्डर का कुल बिल 293 रुपये था, जिसमें सामान की कीमत 288 रुपये और हैंडलिंग चार्ज पांच रुपये शामिल थे। शिकायतकर्ता के अनुसार, कंपनी ने एक उत्पाद की एमआरपी से ज्यादा कीमत दिखाई और फिर उसी बढ़ी हुई कीमत पर डिस्काउंट देने का दावा किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिस उत्पाद की एमआरपी 150 रुपये थी, उसे प्लेटफॉर्म पर 214 रुपये में दिखाया गया। इसके बाद छूट देकर 184 रुपये में बेचा गया। इस तरह ग्राहक से एमआरपी के मुकाबले 34 रुपये अतिरिक्त वसूले गए।
ग्राहक ने उपभोक्ता आयोग में दर्ज कराई शिकायत
कीमतों में अंतर सामने आने के बाद शिव गणेश ने कंपनी के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। संतोषजनक समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया।
शिकायतकर्ता ने मानसिक परेशानी और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पांच लाख रुपये मुआवजे और 50 हजार रुपये कानूनी खर्च की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह सामान की निर्माता नहीं है। कंपनी के अनुसार, कीमतों में अंतर तकनीकी या टाइपिंग संबंधी गलती के कारण हो सकता है। जेप्टो ने यह भी कहा कि शिकायत सामने आने के बाद गलती सुधारी गई और ग्राहक को पूरी ऑर्डर राशि वापस करने की पेशकश की गई थी।
हालांकि आयोग ने कंपनी की दलीलों और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच के बाद एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने को अनुचित व्यापार व्यवहार माना।
कंज्यूमर कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला?
13 अक्टूबर 2026 को रंगारेड्डी जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में फैसला सुनाया। आयोग ने बिल, ऑर्डर के स्क्रीनशॉट और अन्य साक्ष्यों पर विचार किया।
आयोग ने जेप्टो को शिकायतकर्ता को दो हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त 50 हजार रुपये आयोग के उपभोक्ता कानूनी सहायता खाते में जमा करने का आदेश दिया।
इस प्रकार कुल राशि 57 हजार रुपये है। इसमें से ग्राहक को सात हजार रुपये मिलने हैं, जबकि 50 हजार रुपये कानूनी सहायता खाते में जमा किए जाने हैं।
आयोग ने कंपनी को इस तरह का अनुचित व्यापार व्यवहार बंद करने और दोबारा ऐसा नहीं करने का भी निर्देश दिया। आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
क्या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूल सकते हैं?
भारत में पैकेटबंद सामान की एमआरपी अधिकतम खुदरा कीमत होती है। सामान्य खुदरा बिक्री में किसी पैकेटबंद उत्पाद को उसकी घोषित एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
यह नियम केवल किराना दुकान या शॉपिंग मॉल तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन सामान बेचने वाले प्लेटफॉर्म पर भी संबंधित उपभोक्ता संरक्षण और लीगल मेट्रोलॉजी नियम लागू होते हैं।
हालांकि डिलीवरी या हैंडलिंग जैसी अलग सेवाओं के लिए शुल्क का कानूनी मूल्यांकन उनकी प्रकृति और स्पष्ट जानकारी के आधार पर अलग हो सकता है। इसलिए उत्पाद की कीमत और अतिरिक्त सेवा शुल्क को अलग-अलग जांचना जरूरी है।
एमआरपी से ज्यादा पैसे वसूले जाएं तो कहां करें शिकायत?
अगर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या दुकानदार ने आपसे सामान की एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूली है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें?
सबसे पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां रजिस्ट्रेशन करके अपना मोबाइल नंबर और आवश्यक जानकारी दर्ज करें।इसके बाद शिकायत की श्रेणी चुनें और संबंधित कंपनी का नाम दर्ज करें। शिकायत में ऑर्डर की तारीख, उत्पाद की एमआरपी, वसूली गई कीमत और अतिरिक्त रकम का उल्लेख करें।ग्राहक अपने बिल, भुगतान की रसीद, उत्पाद के पैकेट की तस्वीर और ऐप पर दिखाई गई कीमत के स्क्रीनशॉट भी अपलोड कर सकते हैं।शिकायत दर्ज होने के बाद एक डॉकेट नंबर मिलता है, जिसकी मदद से शिकायत की स्थिति देखी जा सकती है।
शिकायत का समाधान नहीं मिले तो उपभोक्ता आयोग जाएं
अगर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन या कंपनी के स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो ग्राहक उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकते हैं।इसके लिए सरकार के ई-जागृति पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत आयोग उपयुक्त मामलों में रिफंड, मुआवजा और मुकदमे के खर्च जैसे राहत आदेश दे सकता है। मुआवजे की राशि प्रत्येक मामले के तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होती है।
ऑनलाइन खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन ऑर्डर करते समय केवल डिस्काउंट देखकर सामान नहीं खरीदना चाहिए। उत्पाद की एमआरपी और भुगतान से पहले दिखाई जाने वाली अंतिम कीमत की तुलना जरूर करें।सामान मिलने के बाद पैकेट पर छपी एमआरपी की जांच करें। यदि कीमत अलग है, तो तुरंत तस्वीर और बिल सुरक्षित रखें।किसी भी विवाद में ऑर्डर का रिकॉर्ड, ग्राहक सेवा के साथ बातचीत और भुगतान का प्रमाण महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
जेप्टो से जुड़ा यह मामला बताता है कि छोटी रकम की अतिरिक्त वसूली को भी उपभोक्ता चुनौती दे सकता है। ग्राहकों को अपने अधिकारों की जानकारी होना और जरूरत पड़ने पर शिकायत करना बेहद जरूरी है।