मजबूत हो रही अर्थव्यवस्था, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर बढ़ा

Update: 2026-07-24 15:49 GMT

मुंबई  :  भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) में लगातार दूसरे सप्ताह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जुलाई को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.08 अरब डॉलर बढ़कर 676.237 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 964 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई थी और यह 675.157 अरब डॉलर रहा था।

आरबीआई की वीकली स्टैटिस्टिकल सप्लीमेंट रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितताओं के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, अब स्थिति में सुधार हो रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत हो रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, सोना, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में देश की रिजर्व स्थिति शामिल होती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश को वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद करता है।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में सुधार और अन्य घटकों में बदलाव रहा है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और अन्य प्रमुख मुद्राएं शामिल होती हैं।

इस साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता, वैश्विक व्यापार से जुड़ी चिंताओं और विभिन्न देशों की आर्थिक नीतियों में बदलाव के कारण कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव देखा गया था। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी इससे प्रभावित हुआ था। लेकिन अब आरबीआई के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश की बाहरी आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे मजबूती आ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में फायदेमंद होता है। इससे रुपये की विनिमय दर में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है और जरूरत पड़ने पर आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे में पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार देश की वित्तीय सुरक्षा को बढ़ाता है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पूंजी प्रवाह में होने वाले बदलावों का असर कम करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आरबीआई लगातार विदेशी मुद्रा बाजार और देश के बाहरी क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखता है। केंद्रीय बैंक की नीतियों का उद्देश्य रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना होता है।

लगातार दूसरे सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों, विदेशी निवेश और व्यापार संतुलन के आधार पर फॉरेक्स रिजर्व में आगे बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 676 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है, जो देश की मजबूत बाहरी आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

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