नई दिल्ली: आगामी फेस्टिव सीजन, विशेष रूप से दिवाली और धनतेरस से ठीक पहले सर्राफा बाजार से आम खरीदारों और निवेशकों के लिए बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद अब सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार मुनाफावसूली और गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय सर्राफा बाजार से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक दोनों कीमती धातुओं के भाव तेजी से नीचे आए हैं, जिससे त्योहारी सीजन में आभूषण खरीदने वालों के चेहरे खिल गए हैं।
बीते सप्ताह के महज चार कारोबारी दिनों के भीतर चांदी के दामों में 16,000 रुपये से अधिक की बड़ी गिरावट देखने को मिली है। वहीं, सोने के तेवर भी ढीले पड़े हैं और इसके भाव में भी हजारों रुपये की कमी आई है। इस गिरावट के बाद चांदी अपनी सर्वकालिक उच्च दर (Record High) से करीब 2.24 लाख रुपये नीचे आ चुकी है।
वायदा बाजार (MCX) और घरेलू बाजार का हाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कुछ सत्रों से जारी बिकवाली के दबाव के कारण कीमती धातुओं के वायदा सौदों में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों में सुस्ती और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी धातुओं पर दबाव देखा गया, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा।
चांदी में बड़ी सेंध: बीते चार दिनों की कारोबारी सुस्ती और मुनाफावसूली ने चांदी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचने के बाद निवेशकों द्वारा की गई बिकवाली से चांदी 16,000 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक सस्ती हो गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी में यह करेक्शन काफी समय से प्रतीक्षित था।
सोना भी हुआ सुस्त: चांदी के साथ-साथ सोने की चमक भी फीकी पड़ी है। ऑल-टाइम हाई से फिसलकर सोने की कीमतें अब निचले स्तरों पर आ गई हैं, जिससे धनतेरस पर सोने के सिक्के, गिन्नियां और आभूषण खरीदने की योजना बना रहे परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।
कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
बाजार विश्लेषकों और कमोडिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस अचानक आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
मुनाफावसूली (Profit Booking): पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी ने निवेशकों को बंपर रिटर्न दिया। लगातार बनते नए रिकॉर्ड के बाद संस्थागत निवेशकों और ट्रेडर्स ने ऊंचे स्तरों पर अपना मुनाफा सुरक्षित (Profit Booking) करना शुरू कर दिया, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ा।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता और डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती के चलते ग्लोबल मार्केट में बुलियन मेटल्स के भाव में नरमी आई।
त्योहारी मांग से ठीक पहले तकनीकी सुधार: तकनीकी चार्ट्स पर सोना और चांदी ओवरबॉट (Overbought) जोन में पहुंच चुके थे। ऐसे में बाजार में एक स्वाभाविक करेक्शन देखा जा रहा है।
दिवाली-धनतेरस की खरीदारी पर असर
भारत में धनतेरस और दिवाली के शुभ अवसर पर सोना और चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। पिछले कुछ हफ्तों से कीमतों में आ रही लगातार तेजी से आम उपभोक्ता चिंतित थे और बजट बिगड़ने का डर सता रहा था।
हालांकि, इस ताजा गिरावट के बाद आभूषण विक्रेताओं (Jewellers) को उम्मीद है कि इस साल धनतेरस और दिवाली पर सर्राफा बाजारों में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ेगी। ज्वेलरी शोरूम्स में एडवांस बुकिंग और पूछताछ में भी तेजी आने की संभावना है।
सराफा कारोबारियों का कहना है कि:
"कीमतों में आया यह करेक्शन ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन मौका है। दिवाली से ठीक पहले आई इस गिरावट से रिटेल मांग (Retail Demand) को भारी बढ़ावा मिलेगा और बाजार में कैश फ्लो बढ़ेगा।"
निवेशकों और खरीदारों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय (Long-term) के लिए सोने और चांदी का आउटलुक अभी भी सकारात्मक और मजबूत बना हुआ है। भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग बनी रहेगी।
ऐसे में जो लोग खुदरा आभूषण, डिजिटल गोल्ड या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह गिरावट खरीदारी का एक अच्छा अवसर साबित हो सकती है। विश्लेषकों का सुझाव है कि त्यौहारों की खरीदारी के लिए एकमुश्त के बजाय किश्तों में या गिरावट का फायदा उठाकर खरीदारी करना समझदारी भरा फैसला होगा।
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