नई दिल्ली : अगर आपने नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को चुना है और आपको लगता है कि टैक्स बचाने के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं, तो नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) आपके लिए एक बड़ा विकल्प साबित हो सकता है। नई टैक्स व्यवस्था में जहां सेक्शन 80C, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और होम लोन के ब्याज जैसी कई पुरानी छूट उपलब्ध नहीं हैं, वहीं NPS के जरिए अब भी टैक्स बचाने का मौका मिल सकता है।
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, सेक्शन 80CCD(2) के तहत कर्मचारी अपने नियोक्ता यानी कंपनी की ओर से किए गए NPS योगदान पर टैक्स लाभ ले सकते हैं। इस नियम की खास बात यह है कि यह सुविधा नई और पुरानी दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में उपलब्ध है। हालांकि, इसका फायदा केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिनकी कंपनी कॉरपोरेट NPS मॉडल से जुड़ी हुई है।
NPS के तहत कर्मचारी के टियर-1 अकाउंट में अगर कंपनी योगदान करती है तो उस राशि पर टैक्स छूट मिलती है। यह लाभ कर्मचारी के खुद के निवेश से अलग होता है। यानी अगर कोई कर्मचारी अपनी तरफ से NPS में पैसा जमा करता है तो नई टैक्स व्यवस्था में उस पर अतिरिक्त टैक्स छूट नहीं मिलती, लेकिन कंपनी की ओर से किया गया योगदान टैक्स बचाने का जरिया बन सकता है।
कैसे मिल सकता है ₹65,500 तक का फायदा?
सेक्शन 80CCD(2) के तहत नियोक्ता द्वारा किया गया NPS योगदान कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के एक निश्चित प्रतिशत तक टैक्स छूट के लिए योग्य होता है। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए यह सीमा आमतौर पर बेसिक सैलरी और DA के 10 प्रतिशत तक होती है, जबकि केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यह सीमा अलग हो सकती है।
अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी इतनी है कि कंपनी NPS में सालाना करीब ₹65,500 का योगदान करती है, तो वह पूरी राशि टैक्स योग्य आय से बाहर हो सकती है। इससे कर्मचारी की टैक्स देनदारी कम हो सकती है।
मान लीजिए किसी कर्मचारी की कंपनी हर महीने NPS खाते में करीब ₹5,458 रुपये जमा करती है। सालभर में यह राशि लगभग ₹65,500 हो जाती है। इस पूरी रकम पर सेक्शन 80CCD(2) के तहत टैक्स लाभ लिया जा सकता है। हालांकि, वास्तविक बचत कर्मचारी की आय और लागू टैक्स स्लैब पर निर्भर करेगी।
रिटायरमेंट फंड बनाने में भी मददगार
NPS केवल टैक्स बचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लंबे समय के लिए रिटायरमेंट फंड तैयार करने का भी एक विकल्प है। इसमें जमा पैसा बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में लगाया जाता है, जिससे लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।
NPS में निवेश करने वालों को रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का विकल्प भी मिल सकता है। यही कारण है कि कई कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को कॉरपोरेट NPS सुविधा उपलब्ध करा रही हैं।
कंपनी से पूछना होगा विकल्प
अगर कोई कर्मचारी नई टैक्स व्यवस्था में है और टैक्स बचाने के विकल्प तलाश रहा है तो उसे अपनी कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग से जानकारी लेनी चाहिए कि क्या कंपनी कॉरपोरेट NPS सुविधा देती है या नहीं।
कर्मचारियों को यह भी समझना जरूरी है कि NPS का फायदा तभी मिलेगा जब योगदान कंपनी की ओर से किया जाए। खुद से किया गया निवेश नई टैक्स व्यवस्था में अतिरिक्त छूट नहीं दिलाता।
नई टैक्स व्यवस्था में सीमित टैक्स छूट के बावजूद NPS एक ऐसा विकल्प है, जो टैक्स बचत के साथ भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत कर सकता है। सही योजना और कंपनी की सुविधा का इस्तेमाल करके कर्मचारी हर साल हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं और रिटायरमेंट के लिए बेहतर फंड तैयार कर सकते हैं।