नई दिल्ली। आयकर विभाग ने ‘छोटे टैक्सपेयर्स की विदेशी संपत्ति के खुलासे की स्कीम, 2026’ के लिए विस्तृत नियम जारी कर दिए हैं। यह कदम 16 अगस्त से शुरू होने वाली वन-टाइम डिस्क्लोजर विंडो से ठीक पहले उठाया गया है। इस योजना के तहत पात्र करदाताओं को पहले घोषित नहीं की गई कुछ विदेशी संपत्तियों और विदेशी आय की जानकारी निर्धारित टैक्स या फीस का भुगतान कर देने का अवसर मिलेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य ऐसे छोटे करदाताओं को राहत का अवसर उपलब्ध कराना है, जिनसे किसी कारणवश अपने आयकर रिटर्न में विदेशी संपत्ति या विदेश से हुई आय की जानकारी देना छूट गया था। निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले टैक्सपेयर इस विशेष विंडो के माध्यम से अपनी जानकारी घोषित कर सकेंगे।

योजना के तहत रेजिडेंट, नॉन-रेजिडेंट और रेजिडेंट बट नॉट ऑर्डिनरीली रेजिडेंट यानी RNOR श्रेणी में आने वाले करदाताओं के लिए भी पात्रता का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, इसके लिए महत्वपूर्ण शर्त यह है कि जिस वर्ष संबंधित विदेशी आय अर्जित की गई या संपत्ति खरीदी गई, उस समय संबंधित व्यक्ति भारत में रेजिडेंट रहा हो।

नियमों के मुताबिक, ऐसे मामले इस योजना के दायरे में आ सकते हैं, जहां करदाता ने संबंधित वर्ष का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल ही नहीं किया हो। इसके अलावा रिटर्न दाखिल करने के बावजूद उसमें विदेशी संपत्ति या विदेशी आय की जानकारी नहीं दी गई हो तो निर्धारित शर्तों के तहत खुलासा किया जा सकेगा।

ऐसी विदेशी आय या संपत्ति के मामलों में भी योजना का लाभ मिलने का प्रावधान बताया गया है, जिनका पहले असेसमेंट नहीं हो सका था। हालांकि, हर मामले में पात्रता योजना के विस्तृत नियमों और संबंधित करदाता की परिस्थितियों के आधार पर तय होगी।

विदेशी संपत्तियों की रिपोर्टिंग आयकर व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विदेश में बैंक खाते, निवेश या दूसरी रिपोर्ट करने योग्य संपत्तियां रखने वाले पात्र करदाताओं को आयकर रिटर्न में निर्धारित नियमों के अनुसार उनकी जानकारी देनी होती है। जानकारी छिपाने या गलत विवरण देने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई और जुर्माने का जोखिम हो सकता है।

नई योजना ऐसे समय में आई है जब आयकर विभाग विदेशी संपत्ति और आय से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। विभिन्न देशों के बीच वित्तीय सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था मजबूत होने से विदेशी खातों और निवेश से संबंधित जानकारी का पता लगाना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

योजना के तहत पात्र टैक्सपेयर को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी अघोषित विदेशी संपत्ति या आय का विवरण देना होगा। इसके साथ योजना में तय टैक्स या फीस का भुगतान भी करना होगा। आयकर विभाग की ओर से जारी विस्तृत नियमों में आवेदन, पात्रता और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधान बताए गए हैं।

16 अगस्त से खुलने वाली वन-टाइम विंडो ऐसे करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, जिनके पिछले रिटर्न में विदेशी संपत्ति से जुड़ी जानकारी अनजाने में छूट गई हो। खासकर विदेश में नौकरी कर चुके लोगों, विदेशी कंपनियों के शेयर या अन्य वित्तीय संपत्ति रखने वाले पात्र व्यक्तियों के लिए नियमों को ध्यान से समझना जरूरी होगा।

हालांकि, केवल विदेश में कोई संपत्ति या आय होना अपने आप इस योजना के तहत पात्रता सुनिश्चित नहीं करता। संबंधित वर्ष में व्यक्ति की भारत में आवासीय स्थिति सहित अन्य शर्तें महत्वपूर्ण रहेंगी। इसलिए टैक्सपेयर को आवेदन करने से पहले अपने पुराने आयकर रिटर्न और विदेशी संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने की जरूरत होगी।

विशेषज्ञ आम तौर पर विदेशी संपत्तियों से संबंधित मामलों में बैंक स्टेटमेंट, निवेश रिकॉर्ड, खरीद की तारीख, संपत्ति की लागत और संबंधित वर्षों की टैक्स रेजिडेंसी जैसी जानकारी सुरक्षित रखने की सलाह देते हैं। इससे यह निर्धारित करने में मदद मिलती है कि कौन-सी संपत्ति या आय भारतीय आयकर कानून के तहत रिपोर्ट की जानी थी।

योजना उन मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहां टैक्सपेयर ने समय पर रिटर्न तो दाखिल किया, लेकिन विदेशी संपत्ति से संबंधित जरूरी विवरण भरने में चूक हो गई। विदेशी आय और संपत्ति की रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधान सामान्य घरेलू आय की तुलना में अधिक जटिल हो सकते हैं।

करदाताओं को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि योजना का लाभ केवल निर्धारित पात्रता और समयसीमा के भीतर ही लिया जा सकेगा। दस्तावेजों में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने से आगे कानूनी परेशानी हो सकती है।

विदेशी संपत्ति से जुड़े टैक्स नियम तकनीकी और व्यक्ति की परिस्थितियों पर निर्भर होते हैं। ऐसे में बड़ी राशि या जटिल विदेशी निवेश वाले मामलों में टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

16 अगस्त से शुरू होने वाली यह वन-टाइम डिस्क्लोजर विंडो पात्र छोटे करदाताओं के लिए पुराने विदेशी संपत्ति और आय संबंधी खुलासों को व्यवस्थित करने का अवसर लेकर आ रही है। अब टैक्सपेयर्स की नजर योजना की समयसीमा और इसके तहत अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर रहेगी।

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