मुंबई : सोमवार को FMCG, PSU बैंक और IT शेयरों में बिकवाली के दबाव के कारण बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में भारी गिरावट आई। बड़े शेयरों में कमजोरी ने बाजार को नीचे खींच लिया, जबकि व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) में मजबूती बनी रही।
सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत गिरकर 71,924.68 पर बंद हुआ। निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,363.35 पर बंद हुआ।
निफ्टी के टेक्निकल आउटलुक पर टिप्पणी करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि निफ्टी का 22,600 के स्तर से ऊपर बने रहने में नाकाम रहने से सकारात्मक शुरुआत 'सेल-ऑन-राइज' (बढ़त पर बिकवाली) वाले सत्र में बदल गई।
विश्लेषकों ने कहा, "PCR गिरकर 0.61 पर आ गया, जो कॉल-हैवी पोजिशनिंग की ओर इशारा करता है, जबकि इंडिया VIX बढ़कर 15.23 हो गया, जो गिरावट से बचाव (डाउनसाइड प्रोटेक्शन) की बढ़ती मांग का संकेत है।"
बाजार पर नजर रखने वालों ने कहा, "निफ्टी का तत्काल सपोर्ट 22,300-22,200 के दायरे में है; अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो इंडेक्स 22,000 के स्तर तक जा सकता है। ऊपर की ओर, लगातार रिकवरी के लिए इंडेक्स को 22,500-22,600 के दायरे में वापस आना होगा।"
निफ्टी में शामिल शेयरों में अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, ITC और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे और बेंचमार्क की गिरावट में अहम भूमिका निभाई।
जहां प्रमुख इंडेक्स दबाव में रहे, वहीं व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.08 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स ने 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।
सत्र के दौरान सेक्टर-वार प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी FMCG और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर, निफ्टी मीडिया और निफ्टी केमिकल इंडेक्स ने नकारात्मक रुझान के विपरीत प्रदर्शन किया और सबसे ज्यादा बढ़त वाले सेक्टर रहे। जानकारों का कहना है कि कुछ खास सेक्टर और बड़े मार्केट इंडेक्स में अच्छी चाल के बावजूद, अहम हैवीवेट शेयरों और सेक्टर में गिरावट की वजह से कारोबार बंद होने तक बेंचमार्क इंडेक्स नेगेटिव दायरे में ही बने रहे।
मार्केट पर नज़र रखने वालों का कहना है कि "मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है; सऊदी और इलाके के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूथी हमलों के कारण सप्लाई में रुकावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।"
एनालिस्ट्स ने बताया कि "विदेशी फंड की बिकवाली के कारण लार्ज-कैप शेयरों पर दबाव बना रहा, जबकि Q2FY27 में बेहतर नतीजों की उम्मीद में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया।"
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