केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों को झटका बढ़ी ब्याज दरों से EMI पर असर
बैंक लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी क्या आपकी मासिक EMI भी बढ़ेगी?
नई दिल्ली : केनरा बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की लेंडिंग रेट में बदलाव से कर्ज लेने वाले ग्राहकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी होम लोन, पर्सनल लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट लोन की EMI भी बढ़ जाएगी। इसका जवाब आपके लोन की ब्याज दर किस बेंचमार्क से जुड़ी है, इस पर निर्भर करता है।
केनरा बैंक ने MCLR बढ़ाया
केनरा बैंक ने 12 अगस्त 2026 से MCLR में 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। यह बदलाव एक महीने से लेकर तीन साल तक की विभिन्न अवधियों के लिए किया गया है।
हालांकि, हर ग्राहक की EMI तुरंत नहीं बढ़ेगी। अगर आपका लोन MCLR से जुड़ा है और उसकी रीसेट डेट पर नई दर लागू होती है, तभी ब्याज और EMI पर असर पड़ सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों पर क्या असर?
बैंक ऑफ बड़ौदा की मौजूदा रिटेल लोन व्यवस्था में कई लोन BRLLR (Baroda Repo Linked Lending Rate) से जुड़े हैं। बैंक की वेबसाइट के अनुसार रिटेल लोन के लिए BRLLR 7.90% है, जबकि MCLR की अलग-अलग अवधियों के लिए अलग दरें लागू हैं।
इसलिए केवल MCLR में बदलाव को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि बैंक ऑफ बड़ौदा के सभी ग्राहकों की EMI बढ़ जाएगी।
किन लोगों की EMI बढ़ सकती है?
मुख्य रूप से इन मामलों में असर पड़ सकता है:
MCLR से जुड़े फ्लोटिंग रेट लोन जिनकी रीसेट डेट आ चुकी है।
ऐसे लोन जिनकी ब्याज दर बैंक के संशोधित लेंडिंग रेट के अनुसार रीसेट होती है।
नए लोन लेने वाले ग्राहक, जिनके लिए संशोधित बेंचमार्क लागू होगा।
वहीं फिक्स्ड रेट लोन लेने वालों पर सामान्यतः इस तरह की MCLR बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ता।
EMI बढ़ेगी या लोन की अवधि?
ब्याज दर बढ़ने पर बैंक आपके लोन की शर्तों के अनुसार EMI बढ़ा सकता है या लोन की अवधि बढ़ा सकता है। इसलिए ग्राहक को अपनी रीसेट डेट और लोन एग्रीमेंट की शर्तें जरूर जांचनी चाहिए।
आसान भाषा में समझें
अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट + MCLR से जुड़ा है, तो दर बढ़ने पर आपकी उधारी महंगी हो सकती है। लेकिन अगर आपका लोन रेपो-लिंक्ड है, तो केवल MCLR बढ़ने से आपकी EMI जरूरी नहीं कि बढ़े। इसलिए सबसे पहले अपने लोन स्टेटमेंट या बैंक से यह पता करें कि आपका लोन MCLR, रेपो रेट/BRLLR या किसी अन्य बेंचमार्क से जुड़ा है।