डिफेंस स्टॉक के दमदार तिमाही नतीजे रेवन्यू में 88% की बढ़ोतरी शेयर रहेगा फोकस में
मुंबई : डिफेंस सेक्टर की कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स (Apollo Micro Systems) ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस अवधि में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। तिमाही नतीजों में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 88 प्रतिशत बढ़कर 251 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वहीं, कंपनी का नेट प्रॉफिट भी सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 25.20 करोड़ रुपये रहा। मजबूत नतीजों के बाद अब सोमवार के कारोबारी सत्र में अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों पर निवेशकों की नजर रहने की उम्मीद है।
शुक्रवार को शेयर बाजार बंद होने के समय बीएसई पर अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का शेयर तेजी के साथ 403.95 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। कंपनी के ताजा तिमाही आंकड़ों ने डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर में निवेश करने वाले निवेशकों का ध्यान एक बार फिर इस स्टॉक की ओर खींचा है। कंपनी के कारोबार में आई तेजी को डिफेंस सेक्टर में बढ़ती मांग और ऑर्डर गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
कंपनी के तिमाही प्रदर्शन की बात करें तो पहली तिमाही में अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का नेट प्रॉफिट 25.20 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इसमें 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी के ऑपरेशनल रेवेन्यू में भी जबरदस्त उछाल आया है। सालाना आधार पर इसमें 88 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 251 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके अलावा कंपनी का EBITDA 18 प्रतिशत बढ़कर 48 करोड़ रुपये हो गया। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी ने राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ अपने ऑपरेशनल प्रदर्शन को भी मजबूत बनाए रखा है।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों का प्रदर्शन भी पिछले कुछ वर्षों में काफी शानदार रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में कंपनी के शेयर की कीमत में करीब 28 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं, वर्ष 2026 में अब तक स्टॉक करीब 46 प्रतिशत चढ़ चुका है। इसी अवधि में सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे इस डिफेंस स्टॉक का प्रदर्शन और भी ज्यादा चर्चा में आया है।
अगर एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों ने करीब 125 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। दो साल की अवधि में शेयर ने लगभग 266 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। वहीं, तीन साल में स्टॉक की कीमत में करीब 551 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है। इस तरह कंपनी के शेयर ने लंबी अवधि के निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है।
पांच साल पहले अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों का रिटर्न और भी ज्यादा रहा है। इस अवधि में स्टॉक ने करीब 3181 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। यानी पांच साल की अवधि में निवेशकों की पूंजी में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, शेयर बाजार में पिछला प्रदर्शन भविष्य में मिलने वाले रिटर्न की गारंटी नहीं होता। इसलिए निवेशकों को केवल पुराने रिटर्न के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए।
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयर से जुड़े एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट एक्शन की बात करें तो कंपनी ने वर्ष 2023 में स्टॉक स्प्लिट किया था। उस समय कंपनी के एक शेयर को 10 हिस्सों में बांटा गया था। इसके बाद शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये प्रति शेयर हो गई। स्टॉक स्प्लिट का उद्देश्य शेयर को निवेशकों के लिए अधिक किफायती बनाना और बाजार में उसकी ट्रेडिंग को आसान बनाना हो सकता है।
कंपनी ने अपने शेयरधारकों को समय-समय पर डिविडेंड भी दिया है। वर्ष 2025 में कंपनी ने प्रति शेयर 0.25 रुपये का डिविडेंड दिया था। इससे पहले 2024 में प्रति शेयर 0.05 रुपये का लाभांश दिया गया था। वर्ष 2022 में भी कंपनी ने प्रति शेयर 0.25 रुपये का डिविडेंड दिया था।
डिफेंस सेक्टर में सरकार की बढ़ती प्राथमिकता के बीच अपोलो माइक्रो सिस्टम्स जैसी कंपनियों पर निवेशकों का फोकस बढ़ा है। कंपनी डिफेंस और एयरोस्पेस से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तथा अन्य तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने के कारोबार में है। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी के ऑर्डर बुक, नए कॉन्ट्रैक्ट, मार्जिन और मुनाफे की रफ्तार शेयर के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।
हालांकि, किसी भी मल्टीबैगर शेयर में निवेश करने से पहले उसके वैल्यूएशन, कर्ज, कैश फ्लो, ऑर्डर बुक, प्रमोटर होल्डिंग और भविष्य की कारोबारी संभावनाओं का मूल्यांकन करना जरूरी है। मजबूत तिमाही नतीजे निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत देते हैं, लेकिन तेज रफ्तार से बढ़ चुके शेयरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी बना रहता है। इसलिए निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार ही फैसला लेना चाहिए।