बिजनेस। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन में जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बिटकॉइन की कीमत एक बार फिर 80 हजार डॉलर के स्तर से नीचे पहुंचने की खबर है। पिछले एक साल में इसकी कीमत में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट का दावा किया जा रहा है। इस गिरावट ने क्रिप्टोकरेंसी बाजार में निवेश करने वाले लोगों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निवेशक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बिटकॉइन में गिरावट का दौर कब थमेगा और क्या आने वाले समय में इसकी कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।
बिटकॉइन की कीमत में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है। यह डिजिटल संपत्ति लंबे समय से तेज तेजी और अचानक गिरावट के लिए जानी जाती है। हालांकि, बड़े स्तर पर कीमतों में गिरावट होने पर निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
80 हजार डॉलर का स्तर क्यों है महत्वपूर्ण?
बिटकॉइन की कीमत में 80 हजार डॉलर का स्तर इस समय निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक सीमा बन गया है।26 अक्टूबर के कारोबार में बिटकॉइन ने लगभग 79,400 डॉलर का निचला स्तर छुआ। हालांकि, दिन के दौरान कीमत दोबारा 80 हजार डॉलर के आसपास पहुंचती भी दिखाई दी। इससे स्पष्ट है कि बाजार में उतार-चढ़ाव काफी तेज है।बाजार के जानकार ऐसे स्तरों पर विशेष नजर रखते हैं, क्योंकि इनके नीचे जाने से कुछ निवेशक अपनी होल्डिंग बेचने का फैसला कर सकते हैं। दूसरी ओर, कम कीमत पर खरीदारी करने वाले निवेशकों की सक्रियता बढ़ने से बाजार में अस्थायी सुधार भी दिखाई दे सकता है।
एक साल में निवेशकों को बड़ा झटका
बिटकॉइन के एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो इसमें करीब 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।26 अक्टूबर के बाजार आंकड़ों में अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सालाना गिरावट लगभग 28 से 30 प्रतिशत के बीच दिखाई गई।इसका अर्थ है कि जिन निवेशकों ने लगभग एक साल पहले ऊंचे स्तर पर बिटकॉइन खरीदा था, उनके निवेश का वर्तमान बाजार मूल्य काफी कम हो सकता है।उदाहरण के लिए, यदि किसी निवेशक ने एक साल पहले एक लाख रुपये का निवेश किया था और उस निवेश का मूल्य 30 प्रतिशत गिर गया, तो उसकी वर्तमान कीमत लगभग 70 हजार रुपये रह जाएगी। हालांकि, वास्तविक रिटर्न खरीद और बिक्री की तारीख, विनिमय दर तथा शुल्क पर निर्भर करेगा।
बिटकॉइन में गिरावट की क्या वजह है?
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण हो सकते हैं।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से संबंधित नीतियां निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती हैं।अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई के जोखिम को लेकर चिंता बढ़ाई है।जब वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो कुछ निवेशक बिटकॉइन जैसी अधिक उतार-चढ़ाव वाली संपत्तियों में अपना निवेश कम कर सकते हैं।
बड़ी बिकवाली से बढ़ा दबाव
बिटकॉइन में गिरावट के दौरान अधिक उधार लेकर कारोबार करने वाले निवेशकों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।क्रिप्टो बाजार में लीवरेज ट्रेडिंग का इस्तेमाल करने वाले निवेशकों की पोजीशन कीमतों में अचानक गिरावट आने पर स्वतः बंद हो सकती है। इसे लिक्विडेशन कहा जाता है।24 अक्टूबर के आसपास आई गिरावट के दौरान क्रिप्टो बाजार में 83 करोड़ डॉलर से अधिक की लीवरेज पोजीशन समाप्त होने की रिपोर्ट सामने आई थी।इस तरह की घटनाएं बिकवाली का दबाव और बढ़ा सकती हैं, जिससे कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिलती है।
क्या खत्म हो रहा है बिटकॉइन का आकर्षण?
बिटकॉइन में गिरावट के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हो रहा है।हालांकि, केवल एक साल की गिरावट के आधार पर बिटकॉइन का भविष्य तय नहीं किया जा सकता।बिटकॉइन पहले भी कई बार बड़ी गिरावट और उसके बाद तेजी के दौर से गुजर चुका है। लेकिन पिछला प्रदर्शन भविष्य में कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं देता।संस्थागत निवेश, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की मांग आने वाले समय में इसकी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
आगे किन स्तरों पर रहेगी नजर?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निकट अवधि में 79 हजार डॉलर के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है।यदि बिटकॉइन इस स्तर से नीचे लगातार कारोबार करता है, तो कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। वहीं, खरीदारी बढ़ने पर इसमें सुधार की संभावना भी बनी रहेगी।हालांकि, किसी भी तकनीकी स्तर को निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता।
निवेशकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते समय जोखिम को समझना बेहद जरूरी है। इसकी कीमतें शेयर बाजार की तुलना में भी कई बार अधिक तेजी से बदल सकती हैं।निवेशकों को केवल सोशल मीडिया पर मिलने वाली सलाह या तेजी के अनुमान के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए।उधार लेकर निवेश करने और पूरी बचत एक ही डिजिटल संपत्ति में लगाने से जोखिम बढ़ सकता है।
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