नई दिल्ली : फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई कम होने और पायलट-इन-कमांड का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद विमानन कंपनी ने बड़ा कदम उठाया है। एयर इंडिया समूह ने अपने सभी पायलटों के लिए प्रतिबंधित पदार्थों की जांच अनिवार्य करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था एयर इंडिया के साथ उसकी बजट विमानन कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलटों पर भी लागू होगी।कंपनी के आंतरिक ज्ञापन के मुताबिक, नई जांच व्यवस्था गुरुवार से प्रभावी हो रही है। इसके अंतर्गत पायलटों की प्रशिक्षण के दौरान, उड़ान के बाद और निर्धारित स्थानों पर जांच की जाएगी। गुरुग्राम स्थित एयर इंडिया प्रशिक्षण अकादमी के साथ पायलटों के होम बेस पर भी जांच की व्यवस्था होगी। कंपनी का कहना है कि यह व्यवस्था मौजूदा नियामकीय परीक्षण के मुकाबले अधिक व्यापक होगी।
मौजूदा नियमों से अधिक होगी जांच
वर्तमान नियामकीय व्यवस्था के तहत विमान कंपनियों को हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू की साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए रैंडम जांच करनी होती है। एयर इंडिया की नई नीति में सभी पायलटों को इसके दायरे में लाया जाएगा। जांच में उन दवाओं और पदार्थों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें विमानन सेवा के दौरान प्रतिबंधित माना गया है।कंपनी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि पायलटों की जांच का विस्तार सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और यात्रियों एवं अन्य हितधारकों का भरोसा बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है। जांच कब और कितनी बार होगी, इससे संबंधित विस्तृत प्रक्रिया कंपनी द्वारा निर्धारित की जाएगी।
300 फीट नीचे आ गया था विमान
यह फैसला 4 अगस्त को एयर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान संख्या AI2379 में हुई गंभीर घटना के बाद लिया गया है। एयरबस A320 नियो विमान उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गया था। घटना के बाद विमान को स्थिर कर लिया गया और वह दिल्ली में सुरक्षित उतर गया। विमान में 137 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे।घटना में यात्रियों और चालक दल के कई सदस्यों को चोटें आई थीं। इसके बाद मानक प्रक्रिया के तहत दोनों पायलटों की साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए जांच की गई। पायलट-इन-कमांड की शुरुआती जांच का परिणाम स्पष्ट रूप से निगेटिव नहीं आने पर नमूना पुष्टि के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था।रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट-इन-कमांड की पुष्टिकरण जांच में मारिजुआना की मौजूदगी सामने आई। हालांकि, केवल पॉजिटिव परिणाम से यह निश्चित नहीं होता कि संबंधित पदार्थ का सेवन कब किया गया या घटना के समय पायलट उसके प्रभाव में था। इन पहलुओं की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
दोनों पायलट ड्यूटी से हटाए गए
घटना के बाद दोनों पायलटों को जांच पूरी होने तक उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। शुरुआत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इस मामले की जांच कर रहा था। घटना को गंभीर श्रेणी में रखे जाने के बाद इसकी जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो को सौंप दी गई।जांच एजेंसी उड़ान के आंकड़ों, विमान की तकनीकी स्थिति, पायलटों के बयान और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं का परीक्षण कर रही है। नियामकीय कार्रवाई जांच के परिणाम और निर्धारित परीक्षण प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।पायलट ने जांच एजेंसी के सामने नींद से जुड़ी परेशानी और चिकित्सक द्वारा दी गई दवा लेने की बात कही है। उसने कथित तौर पर बताया कि फुकेत में ठहराव के दौरान भी उसे ठीक से नींद नहीं आई थी।एयर इंडिया की ओर से सभी पायलटों की जांच का फैसला विमानन सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच आया है। व्यापक परीक्षण से कंपनी को प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन से जुड़े जोखिमों की पहचान करने और समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।