PM मोदी और मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं पर दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से संबंधित उड़ान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भारतीय वायु सेना को दोनों प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं से जुड़े विशेष उड़ान रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार की संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करने से राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने भारतीय वायु सेना के एयर हेडक्वार्टर स्थित डायरेक्टोरेट ऑफ पर्सनल सर्विसेज के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत संवेदनशील उड़ान विवरण देने से इनकार करना उचित था।
केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश को किया रद्द
मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विदेश यात्राओं से जुड़े विशेष उड़ान रिकॉर्ड की जानकारी मांगने से संबंधित था।आरटीआई कार्यकर्ता और भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश के. बत्रा ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत इन यात्राओं का विस्तृत विवरण मांगा था।आवेदन में अप्रैल 2013 से प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं के दौरान इस्तेमाल किए गए वायु सेना के विमानों और उनसे संबंधित स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स की प्रतियां मांगी गई थीं।केंद्रीय सूचना आयोग ने वायु सेना को कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। हालांकि, भारतीय वायु सेना ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अदालत ने जताई चिंता
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं से संबंधित विस्तृत उड़ान दस्तावेज सामान्य प्रशासनिक रिकॉर्ड की तरह नहीं देखे जा सकते।इन दस्तावेजों में विमान, चालक दल, यात्रा में शामिल अधिकारियों और विशेष सुरक्षा समूह (SPG) के कर्मचारियों से संबंधित जानकारियां मौजूद हो सकती हैं।अदालत के अनुसार, ऐसी सूचनाओं का खुलासा प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इससे संबंधित सुरक्षा कर्मचारियों की पहचान और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में भी संवेदनशील जानकारी सामने आने की आशंका रहती है।
RTI कानून की दो महत्वपूर्ण धाराओं का उल्लेख
अदालत ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(a) और धारा 8(1)(g) का उल्लेख किया।धारा 8(1)(a) के तहत ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से छूट दी जा सकती है, जिसके खुलासे से भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा या रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचने की आशंका हो।वहीं धारा 8(1)(g) उन सूचनाओं से संबंधित है, जिनके खुलासे से किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।अदालत ने माना कि संबंधित उड़ान रिकॉर्ड इन सुरक्षा प्रावधानों के दायरे में आते हैं। इसलिए भारतीय वायु सेना का जानकारी देने से इनकार करना कानून के अनुरूप था।
नाम हटाने के बाद भी खत्म नहीं होता सुरक्षा जोखिम
सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी था कि क्या सुरक्षा कर्मचारियों के नाम और पहचान से जुड़ी जानकारी हटाकर शेष रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जा सकते हैं।अदालत ने कहा कि केवल नाम या व्यक्तिगत विवरण हटाने से सुरक्षा संबंधी सभी खतरे समाप्त नहीं होते।विशेष उड़ान रिकॉर्ड में मौजूद अन्य जानकारियों का विश्लेषण करके भी संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।इसी आधार पर अदालत ने स्पेशल फ्लाइट रिटर्न्स के दूसरे भाग यानी SFR-II को सार्वजनिक करने संबंधी केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देश को गलत माना
वर्ष 2020 में आदेश पर लगाई गई थी रोक
इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2020 में भी हस्तक्षेप किया था।उस समय अदालत ने केंद्रीय सूचना आयोग के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।भारतीय वायु सेना ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्राओं के दौरान साथ रहने वाले सुरक्षा कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों का विस्तृत रिकॉर्ड सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।अब अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए वायु सेना के पक्ष को स्वीकार कर लिया है।
सभी विदेश यात्राओं की जानकारी पर प्रतिबंध नहीं
अदालत का फैसला विशेष सुरक्षा-संवेदनशील उड़ान रिकॉर्ड से संबंधित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रधानमंत्री की सभी विदेश यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कई विदेश यात्राओं तथा संबंधित खर्चों की जानकारी पहले से उपलब्ध है।हालांकि, सुरक्षा कर्मचारियों, विमान संचालन और विशेष उड़ान दस्तावेजों से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग श्रेणी में आती है।
पारदर्शिता और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले ने सूचना के अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन के प्रश्न को एक बार फिर सामने रखा है।सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी कामकाज से संबंधित जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है, लेकिन इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं के लिए कुछ अपवाद भी निर्धारित हैं।अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा से संबंधित संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक करने के संभावित जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।