नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 को प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत हुई। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिज़वी ने छात्रों से कहा कि छात्र संघ के संविधान का मसौदा सौंपे जाने के बाद चुनाव की घोषणा की जाएगी। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब छात्रों की भूख हड़ताल 13वें दिन में प्रवेश कर चुकी थी। छात्र जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को बहाल करने, अपने खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग कर रहे हैं।
संविधान का मसौदा आने के बाद चुनाव की घोषणा
रजिस्ट्रार रिज़वी ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और छात्र संघ चुनाव कराने की उनकी मांग पर चर्चा की। उन्होंने संकेत दिया कि संविधान का मसौदा तैयार होने और सौंपे जाने के बाद चुनाव की घोषणा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से चुनाव की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। छात्रों की मुख्य मांग चुनाव का आधिकारिक कार्यक्रम जारी करने की है, इसलिए प्रशासन के आश्वासन के बावजूद आंदोलन तत्काल समाप्त होने के संकेत नहीं मिले हैं।
छात्र संघ बहाली के लिए 13 दिन से भूख हड़ताल
जामिया के पांच छात्र 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में निर्वाचित छात्र संघ की बहाली और चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने तक आंदोलन जारी रहेगा।प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में जामिया मिलिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को फिर से शुरू करना, आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना और चीफ प्रॉक्टर को पद से हटाना शामिल है।छात्रों का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने उनके खिलाफ सख्ती बरती। वे चाहते हैं कि निलंबन, कारण बताओ नोटिस और अन्य अनुशासनात्मक कदमों को वापस लेने के संबंध में लिखित फैसला लिया जाए।
विश्वविद्यालय ने संविधान तैयार करने के लिए बनाई समिति
छात्र संघ की बहाली को लेकर जारी गतिरोध के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 अक्टूबर को छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को 20 दिसंबर 2026 तक मसौदा सौंपने का लक्ष्य दिया गया है।समिति को छात्र संघ के 2006 में भंग होने की परिस्थितियों, संबंधित न्यायिक फैसलों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य छात्र संघ के गठन और चुनाव कराने के लिए आवश्यक नियमों का खाका तैयार करना है।छात्रों ने समिति के गठन को अपनी मुख्य मांग का समाधान नहीं माना है। उनका कहना है कि संविधान तैयार करने की प्रक्रिया के साथ चुनाव की तारीखों का स्पष्ट कार्यक्रम भी घोषित किया जाना चाहिए।
अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपने खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि आंदोलन के दौरान छात्रों को निलंबन और कारण बताओ नोटिस जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।विश्वविद्यालय प्रशासन ने 12 से 21 अक्टूबर के बीच छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करने की बात कही है। हालांकि, छात्रों की मांग है कि कार्रवाई वापस लेने का स्पष्ट लिखित आश्वासन दिया जाए। इसके अलावा वे चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग पर भी कायम हैं।
विरोध के बीच ऑनलाइन हुईं कक्षाएं
शनिवार को प्रदर्शन के 13वें दिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अगले आदेश तक कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का फैसला किया। परिसर में तनाव और छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए यह कदम उठाया गया।इस बीच प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत से भी गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। छात्र अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से उन्हें संविधान तैयार करने वाली समिति के साथ सहयोग करने और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की गई है।
चुनाव की तारीख पर टिकी निगाहें
जामिया में छात्र संघ चुनाव 2005 के बाद से नहीं हुए हैं और छात्र संघ 2006 में भंग कर दिया गया था। ऐसे में मौजूदा आंदोलन का मुख्य मुद्दा परिसर में निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व की बहाली है।अब छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच आगे की बातचीत तथा संविधान का मसौदा तैयार होने की प्रक्रिया पर सबकी नजर है। रजिस्ट्रार के आश्वासन के बावजूद चुनाव की निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव कब होंगे और भूख हड़ताल कब समाप्त होगी।
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