नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को भारी हंगामे के बीच दो विधेयकों को बिना किसी विस्तृत बहस के पारित कर दिया गया। इनमें एक महत्वपूर्ण विधेयक केरल राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से संबंधित है। सदन में विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध और नारेबाजी के बीच विधेयकों को आगे बढ़ाया गया।

कार्यवाही के दौरान कुछ सांसद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग करते हुए नारे लगाते रहे। विरोध कर रहे सदस्य हाथों में प्लेकार्ड लेकर सदन के वेल में भी पहुंच गए। इस वजह से सदन का माहौल काफी हंगामेदार रहा और सामान्य संसदीय कार्यवाही प्रभावित हुई।

हंगामे के बीच दोपहर 2 बजे शुरू हुई कार्यवाही

मंगलवार को सदन की कार्यवाही दोपहर करीब 2 बजे दोबारा शुरू हुई। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। इनमें अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की कथित चोरी का मुद्दा भी शामिल था।

लगातार शोर-शराबे के बावजूद पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने संबंधित सदस्यों को सदन के पटल पर जरूरी कागजात रखने की अनुमति दी।

इसके बाद सरकार की ओर से केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक को सदन में विचार और पारित करने के लिए लिया गया।

‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ पर मुहर

सदन में ‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ को विचार और पारित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। विधेयक का मुख्य उद्देश्य राज्य के नाम में बदलाव करना है। प्रस्ताव के अनुसार, राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ किया जाना है।

नाम परिवर्तन का मुद्दा केरल में लंबे समय से भाषाई और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा रहा है। ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा में राज्य के पारंपरिक नाम के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। प्रस्तावित बदलाव को इसी भाषाई पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, मंगलवार को सदन में जिस परिस्थिति में विधेयक पारित किया गया, उसमें विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी और विरोध के बीच विधायी प्रक्रिया पूरी की गई।

गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग को लेकर विरोध

कार्यवाही के दौरान कई विपक्षी सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की मांग करते हुए नारे लगाते रहे। प्रदर्शन कर रहे सदस्य प्लेकार्ड लेकर वेल में आ गए।

सांसदों के वेल में आने के कारण सदन में शोर बढ़ गया। पीठासीन अधिकारी ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया, लेकिन विरोध जारी रहा।

हंगामे के बीच सरकार ने निर्धारित विधायी एजेंडे के तहत विधेयकों को आगे बढ़ाया। विपक्ष की ओर से विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध जारी रहने के बावजूद विधेयकों को पारित कर दिया गया।

राम मंदिर दान का मुद्दा भी गूंजा

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी का मुद्दा भी विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी में शामिल रहा। विपक्ष ने इस मामले में जवाब और चर्चा की मांग को लेकर विरोध किया।

राम मंदिर से जुड़ा दान देशभर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रहा है। मंगलवार को लोकसभा में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सदस्यों ने नारे लगाए।

हालांकि, हंगामे के कारण इस विषय पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। सदन की कार्यवाही विधायी कामकाज की ओर आगे बढ़ाई गई।

बिना बहस बिल पास होने पर सवाल

विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच विधेयकों को बिना विस्तृत बहस के पारित किए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। सामान्य तौर पर महत्वपूर्ण विधेयकों पर सदन में चर्चा होती है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य अपनी राय रखते हैं।

लेकिन जब सदन में लगातार नारेबाजी और व्यवधान होता है, तो कई बार पीठासीन अधिकारी कार्यवाही को आगे बढ़ाने का निर्णय लेते हैं। मंगलवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला।

‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ जैसे राज्य के नाम से जुड़े विधेयक का महत्व काफी अधिक है, क्योंकि नाम परिवर्तन के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है। इसके बावजूद विधेयक पर व्यापक चर्चा नहीं हो सकी।

केरलम नाम का महत्व

‘केरलम’ शब्द का इस्तेमाल मलयालम में केरल के लिए किया जाता है। राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि संविधान और आधिकारिक दस्तावेजों में भी राज्य का नाम ‘केरलम’ किया जाए।

नाम बदलने के लिए केवल राज्य सरकार का प्रस्ताव पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए संसद में संबंधित विधेयक पारित होना जरूरी है। मंगलवार की कार्यवाही इसी प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी रही।

यदि विधायी प्रक्रिया के सभी चरण पूरे हो जाते हैं तो आधिकारिक तौर पर राज्य का नाम बदलने का रास्ता साफ हो जाएगा।

राजनीतिक हंगामे के बीच आगे बढ़ा विधायी काम

मंगलवार की लोकसभा कार्यवाही में एक ओर विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाता रहा, वहीं दूसरी ओर सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया। गृह मंत्री की मौजूदगी की मांग, राम मंदिर दान का मुद्दा और अन्य राजनीतिक विषयों को लेकर नारेबाजी होती रही।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पीठासीन अधिकारी ने सदन के जरूरी कामकाज को जारी रखा और कागजात पटल पर रखे गए। इसके बाद केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक को लिया गया।

आगे की प्रक्रिया पर नजर

‘केरल (नाम परिवर्तन) बिल, 2026’ के पारित होने के बाद अब राज्य के आधिकारिक नाम में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि, नाम परिवर्तन से संबंधित सभी संवैधानिक और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही इसका प्रभाव पूरी तरह लागू होगा।

मंगलवार का घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि संसद में राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के बावजूद सरकार महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

लोकसभा में भारी हंगामे के बीच दो विधेयकों को बिना विस्तृत चर्चा के मंजूरी मिलना दिन की प्रमुख घटनाओं में रहा। इनमें ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाला विधेयक सबसे महत्वपूर्ण रहा, जबकि विपक्ष ने गृह मंत्री की मौजूदगी और राम मंदिर दान से जुड़े आरोपों को लेकर अपना विरोध जारी रखा।

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