तीन साल के निचले स्तर पर कांग्रेस का चंदा, 75% की गिरावट
कांग्रेस के चंदे में 75 फीसदी गिरावट
नई दिल्ली: देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस को मिलने वाले राजनीतिक चंदे में बड़ी गिरावट का दावा सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्टी को प्राप्त चंदे में करीब 75 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और यह घटकर 131 करोड़ रुपये रह गया है। इसे पिछले तीन वर्षों में सबसे कम राशि बताया जा रहा है। हालांकि, संबंधित वित्त वर्ष और निर्वाचन आयोग में जमा योगदान रिपोर्ट की पुष्टि के बाद ही इन आंकड़ों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। राजनीतिक दलों को मिलने वाला चंदा उनके संगठनात्मक कामकाज, चुनावी तैयारियों और विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत होता है। ऐसे में किसी राष्ट्रीय पार्टी के चंदे में बड़ी गिरावट राजनीतिक वित्तपोषण से जुड़े सवालों को चर्चा में ला सकती है।
अब चुनाव आयोग को सौंपी गई कांग्रेस की वित्त वर्ष 2025-26 की योगदान रिपोर्ट के आधार पर आंकड़े स्पष्ट हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी को 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे के रूप में कुल 130.7 करोड़ रुपये मिले, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह राशि 517.4 करोड़ रुपये थी। यानी एक साल के भीतर पार्टी के घोषित बड़े चंदे में लगभग 386.7 करोड़ रुपये की कमी आई है। यह पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिलने वाले चंदे को लेकर सामने आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस ट्रस्ट ने कांग्रेस को 216 करोड़ रुपये दिए थे, जबकि 2025-26 में यह राशि घटकर केवल 25 करोड़ रुपये रह गई। पिछले वर्ष पार्टी के कुल घोषित चंदे में प्रूडेंट ट्रस्ट की हिस्सेदारी 41.8 प्रतिशत थी, जो इस बार घटकर लगभग 19 प्रतिशत रह गई। इससे पार्टी को मिलने वाले बड़े संस्थागत योगदान में कमी का पता चलता है।
कांग्रेस के चंदे में गिरावट इसलिए भी चर्चा का विषय है, क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बिहार विधानसभा चुनाव हुए थे। इसके अलावा असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में अप्रैल 2026 में होने वाले चुनावों की तैयारियां भी चल रही थीं। इसके बावजूद पार्टी को मिलने वाला घोषित चंदा पिछले वर्षों के मुकाबले कम रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में लोकसभा चुनाव के कारण कांग्रेस के चंदे में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। चुनावी वर्ष में राजनीतिक दलों को मिलने वाले योगदान में वृद्धि होना सामान्य प्रवृत्ति मानी जाती है। हालांकि, इस बार की गिरावट केवल पिछले चुनावी वर्ष की तुलना में ही नहीं है। वित्त वर्ष 2023-24 के मुकाबले भी कांग्रेस को लगभग 53 प्रतिशत कम चंदा मिला है।
प्रमुख चंदा देने वालों में प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के अलावा स्टार सीमेंट लिमिटेड ने पांच करोड़ रुपये का योगदान दिया। सज्जन भजनका ने चार करोड़ रुपये, अफनान कंस्ट्रक्शंस ने तीन करोड़ रुपये और प्रेम कुमार भजनका ने दो करोड़ रुपये दिए। वहीं, इप्सम प्रोएडवाइजर्स और एसएमएस बिल्डर्स की ओर से एक-एक करोड़ रुपये का योगदान दर्ज किया गया। चंदे के आंकड़ों में बड़े दानदाताओं की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के केवल नौ योगदानों से कांग्रेस को कुल 43 करोड़ रुपये मिले। यह पार्टी के कुल घोषित चंदे का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। दूसरी ओर, पांच लाख रुपये या उससे कम के 1,321 योगदानों से कुल 37.2 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इन छोटे योगदानों की हिस्सेदारी लगभग 28.5 प्रतिशत रही।
रिपोर्ट में कुल 1,735 योगदान प्रविष्टियां दर्ज हैं। इनमें मध्यक योगदान राशि तीन लाख रुपये रही। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम आकार के योगदान मिलने के बावजूद कुल चंदे में कुछ बड़े दानदाताओं की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 130.7 करोड़ रुपये का आंकड़ा केवल 20 हजार रुपये से अधिक के घोषित योगदान से संबंधित है। इसे कांग्रेस की कुल आय या सभी स्रोतों से प्राप्त धनराशि नहीं माना जा सकता। राजनीतिक दलों को अन्य माध्यमों से भी आय प्राप्त हो सकती है।
वित्त वर्ष 2024-25 में कांग्रेस को कूपन जारी करने और उनकी बिक्री से 350 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई थी। वित्त वर्ष 2025-26 की पूरी ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद ही पार्टी की कुल आय और अन्य वित्तीय स्रोतों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। कांग्रेस की योगदान रिपोर्ट में सामने आई गिरावट राजनीतिक दलों की फंडिंग और चुनावी खर्च से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला रही है। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि पार्टी को मिलने वाले 20 हजार रुपये से अधिक के घोषित चंदे में उल्लेखनीय कमी आई है। आगामी ऑडिट रिपोर्ट से उसकी समग्र वित्तीय स्थिति की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।