DELHI-NCR: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करते हुए राज्य के 258 ब्लॉकों में कैंडल मार्च आयोजित किया। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर छात्रों के साथ एकजुटता जताई और केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की। इस दौरान कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग उठाई।

कांग्रेस का कहना है कि देश में बार-बार होने वाले पेपर लीक ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं से उनका विश्वास व्यवस्था से उठता जा रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य की सुरक्षा करने में विफल रही है।
258 ब्लॉकों में एक साथ कैंडल मार्च
कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढांचे का उपयोग करते हुए राज्य के सभी 258 ब्लॉकों में एक साथ कैंडल मार्च निकालकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालयों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर पर हजारों कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल हुए।
कैंडल मार्च के दौरान युवाओं ने "पेपर लीक बंद करो", "युवाओं को न्याय दो", "भ्रष्टाचार खत्म करो" और "भविष्य से खिलवाड़ बंद करो" जैसे नारे लगाए। कई जगह छात्र संगठनों ने भी कांग्रेस के कार्यक्रम में भाग लिया।
पार्टी नेताओं का कहना था कि यह केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य की लड़ाई है।
कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं। इससे लाखों उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं।
पार्टी का कहना है कि
भर्ती परीक्षाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।
कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ रही हैं।
छात्रों को बार-बार तैयारी करनी पड़ रही है।
गरीब परिवारों के युवाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
युवाओं का सरकारी भर्ती प्रक्रिया से विश्वास उठ रहा है।
कांग्रेस ने कहा कि यदि सरकार समय रहते कठोर कार्रवाई करती तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
आंदोलन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही मंत्रालय की होती है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि जब बार-बार राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं तो नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि
परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं है।
पेपर लीक रोकने में विफलता रही है।
दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं होती।
छात्रों को केवल आश्वासन मिलता है।
इसी आधार पर पार्टी ने शिक्षा मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
युवाओं के भविष्य पर संकट
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने में कई छात्रों के दो से पांच वर्ष तक लग जाते हैं।
कई अभ्यर्थी
कोचिंग संस्थानों में लाखों रुपये खर्च करते हैं।
परिवार से दूर रहकर तैयारी करते हैं।
नौकरी छोड़कर परीक्षा की तैयारी करते हैं।
आर्थिक और मानसिक दबाव झेलते हैं।
ऐसे में यदि परीक्षा रद्द हो जाती है या पेपर लीक हो जाता है तो सबसे बड़ा नुकसान मेहनती छात्रों को होता है।
छात्रों में बढ़ रहा आक्रोश
हाल के वर्षों में विभिन्न राज्यों में पेपर लीक के विरोध में छात्रों ने कई बार प्रदर्शन किए हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगें हैं—
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली।
समयबद्ध भर्ती।
पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत कानून।
दोषियों को कठोर सजा।
परीक्षा केंद्रों की बेहतर निगरानी।
कांग्रेस ने कहा कि वह छात्रों की इन्हीं मांगों को लेकर सड़क पर उतरी है।
कैंडल मार्च का संदेश
कांग्रेस नेताओं के अनुसार कैंडल मार्च केवल विरोध का प्रतीक नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के समर्थन का संदेश है।
मोमबत्ती जलाकर प्रदर्शन करने का उद्देश्य यह बताना था कि
युवाओं के सपने बुझने नहीं दिए जाएंगे।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है।
शिक्षा प्रणाली को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए।
पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
कई जिलों में बड़ी संख्या में पहुंचे छात्र
कई स्थानों पर कांग्रेस के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र भी शामिल हुए।
छात्रों ने कहा कि
"हम केवल निष्पक्ष परीक्षा चाहते हैं।"
"मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय मिलना चाहिए।"
"पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
कई छात्रों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने से उनका एक वर्ष खराब हो जाता है।
कांग्रेस ने गिनाईं अपनी मांगें
कांग्रेस ने आंदोलन के दौरान सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं—
पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच।
दोषियों पर कठोर कार्रवाई।
परीक्षा प्रणाली का डिजिटलीकरण।
प्रश्नपत्र सुरक्षा के आधुनिक उपाय।
समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया।
परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही।
प्रभावित छात्रों को राहत।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत
शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों से परीक्षा प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि
डिजिटल एन्क्रिप्शन का उपयोग बढ़ाया जाए।
प्रश्नपत्र वितरण प्रक्रिया सुरक्षित बने।
परीक्षा केंद्रों की निगरानी मजबूत हो।
साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
भर्ती एजेंसियों की नियमित ऑडिट हो।
विपक्ष का संयुक्त हमला
पेपर लीक मुद्दे पर कांग्रेस के अलावा कई विपक्षी दल भी सरकार को घेरते रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि
युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा।
भर्ती प्रक्रिया लगातार प्रभावित हो रही है।
परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कम हो रहा है।
हालांकि सरकार का कहना है कि पेपर लीक रोकने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
युवाओं की उम्मीदें
देश में हर वर्ष करोड़ों युवा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेते हैं।
इनमें शामिल हैं—
UPSC
SSC
रेलवे भर्ती
बैंकिंग परीक्षाएं
शिक्षक भर्ती
पुलिस भर्ती
राज्य लोक सेवा आयोग
अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाएं
इन सभी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार और परीक्षा एजेंसियों की बड़ी जिम्मेदारी है।
राजनीतिक असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि युवाओं से जुड़े मुद्दे चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पेपर लीक जैसे मुद्दे
रोजगार
शिक्षा
पारदर्शिता
प्रशासनिक जवाबदेही
जैसे विषयों से सीधे जुड़े होते हैं।
इसी कारण कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक और जनआंदोलन दोनों रूपों में उठा रही है।
आगे की रणनीति
कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
संभावित कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं—
जिला स्तर पर धरना।
राज्यव्यापी प्रदर्शन।
छात्र संगठनों के साथ संयुक्त आंदोलन।
राज्यपाल को ज्ञापन।
संसद और विधानसभा में मुद्दा उठाना।

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