लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी का कांग्रेस, टीएमसी और सपा ने किया बहिष्कार
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद गुरुवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी में विपक्षी दलों की दूरी देखने को मिली। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया। हालांकि, कुछ विपक्षी नेताओं ने इस पारंपरिक मिलन समारोह में हिस्सा लिया।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से आयोजित चाय पार्टी संसद सत्र समाप्त होने के बाद होने वाली एक परंपरा का हिस्सा है। इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एक साथ शामिल होकर अनौपचारिक बातचीत करते हैं। लेकिन इस बार विपक्ष के प्रमुख दलों ने इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक कारणों से कार्यक्रम से दूरी बनाई। विपक्षी दलों और सरकार के बीच संसद सत्र के दौरान कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली थी। ऐसे में सत्र समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक मतभेदों का असर दिखाई दिया।
सूत्रों के मुताबिक, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) की नेता कनिमोझी लोकसभा स्पीकर की ओर से आयोजित इस पारंपरिक मिलन समारोह में शामिल हुईं। उनकी मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि सभी विपक्षी दलों का रुख एक जैसा नहीं था।
वहीं, राज्यसभा में भी सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से आयोजित चाय पार्टी में विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए।
संसद सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर गतिरोध बना रहा। विपक्ष ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की मांग की थी, जबकि सरकार ने अपने एजेंडे के अनुसार कामकाज आगे बढ़ाया। कई मौकों पर सदन में हंगामा भी देखने को मिला।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सामान्य तौर पर आयोजित होने वाली चाय पार्टियां राजनीतिक संवाद का एक अवसर मानी जाती हैं। इन कार्यक्रमों में औपचारिक राजनीति से अलग नेताओं के बीच बातचीत का माहौल बनता है।
हालांकि, इस बार लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी में कांग्रेस, टीएमसी और सपा की अनुपस्थिति ने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों का यह कदम संसद सत्र के दौरान बने मतभेदों को दर्शाता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि संसद में सरकार और विपक्ष के बीच संबंधों में तनाव का असर ऐसे पारंपरिक कार्यक्रमों पर भी पड़ रहा है। हालांकि, दूसरी ओर कुछ दलों के नेताओं की मौजूदगी यह भी बताती है कि सभी विपक्षी दल हर मुद्दे पर एक समान रणनीति नहीं अपना रहे हैं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला समय-समय पर सदन की कार्यवाही के अलावा सांसदों के बीच बेहतर संवाद और समन्वय पर जोर देते रहे हैं। चाय पार्टी जैसे आयोजन इसी उद्देश्य से किए जाते हैं, जहां सांसद आपसी बातचीत कर सकें।
वहीं, राज्यसभा में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की भागीदारी ने अलग तस्वीर पेश की। मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी से यह स्पष्ट हुआ कि उच्च सदन में विपक्ष ने इस परंपरा में हिस्सा लेने का फैसला किया।
फिलहाल लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी का बहिष्कार राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष और सरकार के बीच संवाद की स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
संसद का अगला सत्र शुरू होने से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने मुद्दों और रणनीतियों पर काम करेंगे। ऐसे में सत्र के दौरान दिखा टकराव और उसके बाद हुए कार्यक्रमों में दूरी आने वाले राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।