नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए पार्टी नेताओं और वॉलंटियर्स को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस ने हिरासत में लिए गए सदस्यों से मिलने पहुंचे वकीलों को पुलिस स्टेशन में प्रवेश करने से रोक दिया। हालांकि, वकीलों को रोके जाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सीजेपी के प्रमुख नेताओं आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और सौरव दास को हिरासत में लिया। इन नेताओं के साथ मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। घटना के बाद पार्टी नेतृत्व ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।अभिजीत दिपके ने बताया कि उन्होंने पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह से बातचीत की थी। इस बातचीत के दौरान उन्हें हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति के बारे में जानकारी मिली।दिपके के मुताबिक, रत्ना सिंह ने बताया कि आशुतोष, अजिंक्य और सौरव को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है, जबकि उनके साथ मौजूद 11 वॉलंटियर्स को दूसरी जगह ले जाया गया है।अभिजीत दिपके ने कहा, "मैंने अभी-अभी रत्ना से बात की। उन्होंने मुझे बताया कि आशुतोष, अजिंक्य और सौरव को अलग-अलग रखा गया है। उनके साथ मौजूद 11 वॉलंटियर्स को कहीं और ले जाया गया है।"
उन्होंने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की जानकारी स्पष्ट करने की मांग की।दिल्ली में सीजेपी कार्यकर्ताओं की हिरासत का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही है। संगठन चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सवाल उठा रहा है।सीजेपी ने पहले भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी के नेताओं और समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा और अनुमति संबंधी कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को रोका था।
मंगलवार सुबह सीजेपी के कुछ नेता और कार्यकर्ता जंतर-मंतर पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने वहां लगाए गए पुलिस बैरिकेड पार किए। इसके बाद पुलिस ने आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया।जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी विवाद सामने आया है। पुलिस की ओर से प्रदर्शन स्थल पर प्रतिबंधात्मक व्यवस्थाएं लागू किए जाने की खबर है, जबकि सीजेपी कार्यकर्ता वहां विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे।अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं से संपर्क करने में भी परेशानी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की कानूनी टीम को हिरासत में रखे गए लोगों तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।वकीलों को पुलिस स्टेशन में प्रवेश नहीं देने का आरोप भी इसी घटनाक्रम से जुड़ा है। हालांकि, इस विशेष आरोप पर दिल्ली पुलिस का सत्यापित आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है।
सीजेपी नेताओं की हिरासत को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले 10 अक्टूबर को भी दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया था। ये नेता मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले थे।उस समय भी पार्टी ने हिरासत में लिए गए नेताओं के ठिकाने की जानकारी नहीं मिलने का आरोप लगाया था। बाद में नेताओं को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और 11 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया।मंगलवार की कार्रवाई के बाद पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं की स्थिति, उन्हें किन स्थानों पर रखा गया और वकीलों को मिलने की अनुमति दी गई या नहीं, इन सवालों पर आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इस बीच सीजेपी कार्यकर्ताओं की हिरासत और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं।