पराली जलाने वालों पर कसेगा शिकंजा, CAQM ने राज्यों को दिए निर्देश

Update: 2026-07-29 15:28 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों के मौसम से पहले बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बड़ा कदम उठाया है। पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए आयोग ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को ड्रोन तकनीक से निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब खेतों में देर शाम या रात के समय पराली जलाने वालों पर विशेष नजर रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

CAQM ने चारों राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर आगामी धान कटाई सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। आयोग का मानना है कि कुछ लोग सेटेलाइट निगरानी से बचने के लिए दिन के समय के बजाय शाम और रात के बीच पराली जलाने की कोशिश करते हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।

आयोग के अनुसार, कई बार किसान या अन्य लोग दोपहर बाद करीब तीन बजे से रात नौ बजे के बीच पराली जलाते हैं। इस समय सेटेलाइट निगरानी में कई घटनाएं स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हो पाती हैं। अब ड्रोन तकनीक के जरिए ऐसे मामलों की पहचान करना आसान होगा। हाई रिजोल्यूशन आरजीबी कैमरे, जीपीएस सिस्टम, जियो-फेंसिंग और लाइव स्ट्रीमिंग सुविधा से लैस ड्रोन खेतों में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे।

ड्रोन के जरिए पराली जलाने की घटनाओं के वीडियो और अन्य डिजिटल सबूत भी जुटाए जाएंगे। इसमें धुएं के गुबार, जली हुई जमीन और खेतों की सीमाओं का जियो-टैग डेटा तैयार किया जाएगा। इससे प्रशासन को मौके पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को मजबूत आधार मिल सकेगा।

CAQM ने निर्देश दिया है कि ड्रोन निगरानी के लिए उन गांवों को प्राथमिकता दी जाए जहां पिछले वर्षों में पराली जलाने की घटनाएं ज्यादा सामने आई हैं। इन हॉटस्पॉट गांवों के लिए पहले से फ्लाइट प्लान तैयार किए जाएंगे ताकि कटाई के मौसम में समय पर निगरानी शुरू की जा सके।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्रोन संचालन ड्रोन नियम, 2021 के तहत किया जाएगा। ड्रोन से मिलने वाली सभी लाइव फीड और रिकॉर्ड किए गए डेटा को CAQM के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा। वीडियो रिकॉर्डिंग को तीन महीने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच और कानूनी कार्रवाई में इसका उपयोग किया जा सके।

दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ने में पराली जलाने को एक बड़ा कारण माना जाता है। पंजाब, हरियाणा और आसपास के राज्यों में धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में बचने वाले फसल अवशेषों को जलाने से हवा में जहरीले कणों की मात्रा बढ़ जाती है। इसका असर दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता पर पड़ता है।

इस बार CAQM ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है ताकि पराली जलाने की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके। राज्यों को स्थानीय प्रशासन, कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने चारों राज्यों से ड्रोन निगरानी व्यवस्था को लेकर की गई तैयारियों की एक्शन टेकन रिपोर्ट 14 अगस्त 2026 तक जमा करने को कहा है। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद पराली जलाने वालों की पहचान तेजी से हो सकेगी और प्रदूषण नियंत्रण अभियान को मजबूती मिलेगी।

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