दिल्ली को मिलेगी पेयजल संकट से राहत, 7200 करोड़ की योजना शुरू

Update: 2026-07-31 15:25 GMT

दिल्ली: हर साल गर्मियों के दौरान गहराने वाले पेयजल संकट को दूर करने के लिए एक बड़ी योजना तैयार की गई है। हरियाणा से दिल्ली आने वाले पानी की बर्बादी रोकने के लिए अब मुनक नहर की जगह पाइपलाइन बिछाने की तैयारी की जा रही है। करीब 7200 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से दिल्ली को मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ने और जल संकट कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजधानी दिल्ली में पेयजल आपूर्ति के लिए यमुना नदी के अलावा हरियाणा से आने वाले पानी पर भी काफी निर्भरता है। हरियाणा से दिल्ली तक पानी पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से मुनक नहर की दो शाखाओं कैरियर लाइन चैनल (CLC) और दिल्ली सब ब्रांच (DSB) का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि पुरानी और कच्ची नहरों के कारण रास्ते में काफी मात्रा में पानी बर्बाद हो जाता है।

दिल्ली सब ब्रांच (DSB) नहर लंबे समय से खराब स्थिति में है। कच्ची होने के कारण इसमें जगह-जगह रिसाव होता है, जिससे हरियाणा से छोड़ा गया पानी दिल्ली पहुंचने से पहले ही कम हो जाता है। गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ने के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इसी नुकसान को रोकने के लिए अब नहर की जगह आधुनिक पाइपलाइन प्रणाली विकसित करने की योजना बनाई गई है।

इस परियोजना को लेकर हरियाणा सरकार से भी अनुमति मिल चुकी है। प्रस्तावित पाइपलाइन की क्षमता करीब 1000 क्यूसेक पानी पहुंचाने की होगी। दिल्ली सरकार इस परियोजना का खर्च उठाएगी, जबकि पाइपलाइन बिछाने का काम हरियाणा सरकार करेगी। फिलहाल इस योजना की व्यवहारिकता जांचने के लिए आइआइटी रुड़की से अध्ययन कराया जा रहा है।

मौजूदा व्यवस्था में दिल्ली को पानी पहुंचाने वाली मुनक नहरों से काफी नुकसान होता है। पहले केवल दिल्ली सब ब्रांच नहर से पानी आता था, लेकिन रिसाव की समस्या को देखते हुए कैरियर लाइन चैनल का निर्माण कराया गया था। इसके लिए दिल्ली सरकार ने हरियाणा को करीब 500 करोड़ रुपये दिए थे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर दोनों राज्यों के बीच कई बार विवाद भी सामने आए।

अदालत के निर्देश के बाद वर्ष 2014 से हरियाणा ने दिल्ली को उसके हिस्से का पूरा पानी देना शुरू किया। कैरियर लाइन चैनल के जरिए द्वारका, बवाना और ओखला के जल उपचार संयंत्रों को पानी मिलता है। इससे करीब 600 क्यूसेक पानी दिल्ली पहुंचता है। वहीं लगभग 300 क्यूसेक पानी अब भी दिल्ली सब ब्रांच नहर से आता है।

जानकारी के अनुसार, डीएसबी नहर के जरिए आने वाले पानी में लगभग 45 प्रतिशत तक नुकसान हो जाता है। वहीं सीएलसी नहर से करीब पांच प्रतिशत पानी बर्बाद होता है। रिसाव, वाष्पीकरण और अन्य कारणों से हरियाणा से दिल्ली पहुंचने से पहले लगभग 150 क्यूसेक पानी कम हो जाता है। यही वजह है कि सरकार अब पाइपलाइन व्यवस्था को बेहतर विकल्प मान रही है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली तक अधिक मात्रा में स्वच्छ और सुरक्षित पानी पहुंचाना है। पाइपलाइन के जरिए पानी की बर्बादी कम होगी और भविष्य में बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

मुनक गांव से शुरू होने वाली यह नहर दिल्ली के हैदरपुर तक जाती है। इसकी कुल लंबाई करीब 102 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 17 किलोमीटर हिस्सा दिल्ली क्षेत्र में आता है। नई पाइपलाइन योजना के लागू होने के बाद पानी की आपूर्ति व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो दिल्ली में गर्मियों के दौरान होने वाली पानी की किल्लत को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही जल संरक्षण और बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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