पप्पू यादव पर FIR की मांग, पुलिस का जवाब

Update: 2026-08-01 10:45 GMT

नई दिल्ली: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के संसद परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनकर प्रदर्शन करने का मामला अब विवादों में घिर गया है। शुक्रवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान किए गए इस प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ता ने सांसद पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है।

जानकारी के अनुसार, जहांगीरपुरी थाने में सूरज प्रकाश नामक व्यक्ति ने पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में गेरुआ वस्त्र पहनकर किए गए प्रदर्शन से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर स्पष्ट किया है कि संसद भवन क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शिकायत प्राप्त कर ली गई है, लेकिन अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। जरूरत पड़ने पर शिकायत को संबंधित जांच एजेंसी के पास भेजा जा सकता है।

दरअसल, शुक्रवार को विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चंदे के मुद्दे को लेकर संसद परिसर में एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में पप्पू यादव गेरुआ वस्त्र पहनकर मंदिर के पुजारी की भूमिका में नजर आए थे। उनके हाथ में भगवान राम की तस्वीर थी और उन्होंने नुक्कड़ नाटक के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया था।

प्रदर्शन के दौरान कुछ सांसद श्रद्धालुओं की भूमिका निभाते हुए नजर आए। उन्होंने दान पात्र में रुपये डालने का अभिनय किया, जबकि पप्पू यादव पुजारी की भूमिका में उन रुपयों को अपनी जेब में रखने का प्रतीकात्मक प्रदर्शन करते दिखाई दिए। इसी को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कई लोगों ने इस प्रदर्शन पर आपत्ति जताई।

प्रदर्शन के बाद पप्पू यादव ने अपनी सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि गेरुआ रंग त्याग, तपस्या और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने गेरुआ वस्त्र भारतीय परंपरा के सम्मान के रूप में पहना था।

पप्पू यादव ने यह भी कहा कि उनका प्रदर्शन एक राजनीतिक मुद्दे को उठाने के लिए था और इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि उनके इस बयान के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ और कई संगठनों ने उनके खिलाफ नाराजगी जताई।

बता दें कि पप्पू यादव करीब दो वर्ष पहले अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वर्तमान में वह विपक्षी खेमे के साथ संसद में सक्रिय हैं।

राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जहां विपक्ष इसे सरकार से जुड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बता रहा है, वहीं विरोध करने वाले लोग इसे धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल से जोड़कर देख रहे हैं।

फिलहाल दिल्ली पुलिस ने शिकायत को स्वीकार कर लिया है, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि आगे की कार्रवाई शिकायत और जांच के आधार पर की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मामले को किस एजेंसी को भेजा जाता है और आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।

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