DU Admission 2026: नए शहर में फ्रेशर्स की टेंशन खत्म, PG-Flat ढूंढने में मदद कर रहे सीनियर्स
नए छात्रों के लिए सीनियर्स बने सहारा, PG और फ्लैट खोजने में कर रहे मदद
DELHI-NCR: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में दाखिले की प्रक्रिया के बीच हर साल की तरह इस बार भी हजारों छात्र देश के अलग-अलग राज्यों से राजधानी पहुंच रहे हैं। नए शहर, नई यूनिवर्सिटी और रहने की व्यवस्था को लेकर छात्रों की सबसे बड़ी चिंता होती है। ऐसे में DU के सीनियर छात्र फ्रेशर्स की मदद के लिए आगे आए हैं और उनके लिए PG (पेइंग गेस्ट), फ्लैट और किराये के कमरे ढूंढने में सहयोग कर रहे हैं।
यह पहल न सिर्फ नए छात्रों का तनाव कम कर रही है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और बजट के अनुसार आवास उपलब्ध कराने में भी मददगार साबित हो रही है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद अधिकांश बाहरी राज्यों के छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रहने की व्यवस्था की होती है। विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को हॉस्टल नहीं मिल पाता, ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पीजी, फ्लैट या किराये के कमरों का सहारा लेना पड़ता है।
नए शहर से अनजान होने के कारण कई छात्र उचित किराया, सुरक्षित इलाका और भरोसेमंद मकान तलाशने में परेशान हो जाते हैं।
सीनियर्स बने फ्रेशर्स का सहारा
इस समस्या को देखते हुए विभिन्न कॉलेजों और छात्र समूहों के सीनियर्स नए छात्रों की मदद कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया ग्रुप, कॉलेज नेटवर्क और पूर्व छात्रों के संपर्कों के जरिए खाली पीजी और फ्लैट की जानकारी साझा कर रहे हैं।
कई सीनियर्स खुद फ्रेशर्स के साथ इलाके का दौरा कर उन्हें उपलब्ध विकल्प दिखा रहे हैं, ताकि नए छात्र बिना किसी परेशानी के रहने की जगह चुन सकें।
बजट और सुरक्षा पर खास ध्यान
सीनियर छात्र केवल कमरा ढूंढने में ही मदद नहीं कर रहे, बल्कि नए विद्यार्थियों को यह भी बता रहे हैं कि किस इलाके में रहना सुरक्षित रहेगा, किस PG में बेहतर सुविधाएं हैं और किन जगहों पर किराया अपेक्षाकृत कम है।
वे छात्रों को मकान मालिक से एग्रीमेंट, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बिजली-पानी के बिल और अन्य जरूरी शर्तों की जानकारी भी दे रहे हैं, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
सोशल मीडिया बना बड़ा सहारा
व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई छात्र समूह सक्रिय हैं, जहां रोजाना PG, फ्लैट और रूममेट से जुड़ी जानकारी साझा की जा रही है।
इन समूहों के माध्यम से फ्रेशर्स सीधे सीनियर्स से संपर्क कर अपनी जरूरत और बजट के अनुसार आवास तलाश पा रहे हैं।
नए छात्रों का बढ़ा आत्मविश्वास
फ्रेशर्स का कहना है कि सीनियर्स की मदद से नए शहर में खुद को अकेला महसूस नहीं हो रहा। रहने की व्यवस्था जल्दी होने से वे एडमिशन, दस्तावेज़ सत्यापन और पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे पा रहे हैं।
कई अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की है और इसे नए छात्रों के लिए बेहद उपयोगी बताया है।
स्वागत की नई परंपरा
दिल्ली विश्वविद्यालय में हर वर्ष सीनियर्स द्वारा फ्रेशर्स की सहायता की ऐसी पहल देखने को मिलती है। इससे नए विद्यार्थियों को न केवल रहने की जगह मिलती है, बल्कि उन्हें कॉलेज, आसपास के इलाके, परिवहन और विश्वविद्यालय के माहौल को समझने में भी आसानी होती है।