नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के नजफगढ़ इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक घर में एलपीजी गैस रिसाव के कारण हुए भीषण धमाके ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे एक ही परिवार के चार सदस्यों की 12 दिनों के भीतर मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी, उनकी मां और बहन शामिल हैं। हादसे के बाद तीन महीने का मासूम बच्चा अपने माता-पिता को हमेशा के लिए खो चुका है, जबकि चार साल की बच्ची के सिर से मां का साया उठ गया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।

घटना नजफगढ़ के राणाजी एन्क्लेव इलाके में 22 सितंबर 2026 की रात हुई थी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में घरेलू एलपीजी सिलेंडर से गैस रिसाव के बाद विस्फोट होने की आशंका जताई गई है। हादसे में परिवार के छह लोग झुलस गए थे। घायलों को पहले आईजीआई अस्पताल ले जाया गया और बाद में सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान अलग-अलग तारीखों पर चार लोगों की मौत हो गई।

22 सितंबर की रात हुआ था भीषण धमाका

पुलिस के अनुसार, नजफगढ़ के राणाजी एन्क्लेव स्थित रामजी लाल के घर में 22 सितंबर की रात अचानक जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट के बाद घर में आग फैल गई और वहां मौजूद परिवार के सदस्य उसकी चपेट में आ गए।

धमाका इतना तेज था कि मकान के भूतल के साथ पहली मंजिल पर भी उसका असर दिखाई दिया। पहली मंजिल का गेट क्षतिग्रस्त हो गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घर में मौजूद छह लोगों के झुलसने की जानकारी सामने आई। सभी को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

12 दिनों में चार लोगों ने तोड़ा दम

इस हादसे में सबसे पहले रामजी लाल की 29 वर्षीय बेटी मोनिका की 28 सितंबर को मौत हो गई।

इसके बाद परिवार को लगातार दुखद खबरों का सामना करना पड़ा। रामजी लाल के 25 वर्षीय बेटे केशव ने 1 अक्टूबर को दम तोड़ दिया।

केशव की पत्नी सोनम (24 वर्ष) की 3 अक्टूबर को उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके अगले दिन 4 अक्टूबर को रामजी लाल की 50 वर्षीय पत्नी कमलेश भी जिंदगी की जंग हार गईं।

इस तरह महज 12 दिनों के भीतर परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। एक ही घर में लगातार हुई मौतों ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

तीन महीने का युवांश हुआ अनाथ

हादसे का सबसे दुखद पहलू तीन महीने के मासूम युवांश से जुड़ा है। युवांश के पिता केशव और मां सोनम की मौत के बाद बच्चा अनाथ हो गया है।

अब मासूम अपने दादा रामजी लाल के साथ रह रहा है। इतनी छोटी उम्र में माता-पिता का साथ छूट जाने से बच्चे के भविष्य और पालन-पोषण की जिम्मेदारी परिवार के अन्य सदस्यों पर आ गई है।

इस हादसे ने केवल चार लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि दो छोटे बच्चों के जीवन को भी हमेशा के लिए बदल दिया।

चार साल की दिया से छिन गया मां का साया

हादसे में जान गंवाने वाली मोनिका की चार वर्षीय बेटी दिया भी आग की चपेट में आई थी। हालांकि, बच्ची की जान बच गई।

पुलिस के अनुसार, मोनिका अपनी बेटी दिया के साथ माता-पिता के घर आई हुई थीं। इसी दौरान घर में गैस रिसाव के कारण विस्फोट हो गया।

मोनिका के पति राहुल और परिवार के अन्य सदस्य गुरुग्राम के बादशाहपुर इलाके में रहते हैं।

हादसे में दिया की मां की मौत हो गई। अब चार वर्षीय बच्ची को अपनी मां के बिना जीवन बिताना होगा।

दीवार के पास सो रहे थे दोनों बच्चे

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हादसे के समय दोनों बच्चे एक ऐसे बिस्तर पर सो रहे थे, जो दीवार के नजदीक रखा हुआ था।

आशंका जताई गई है कि बिस्तर की स्थिति के कारण आग की लपटें बच्चों तक सीधे नहीं पहुंच सकीं। इससे दोनों की जान बच गई।

हालांकि, हादसे में बच्चों को भी चोटें आई थीं। पुलिस ने बताया कि गंभीर रूप से घायल परिवार के सदस्यों के शरीर का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा झुलस गया था।

बंद कमरे में गैस जमा होने से विस्फोट की आशंका

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर से गैस लीक होकर कमरे में जमा हो गई थी।

कमरे में पर्याप्त हवा की आवाजाही नहीं थी। इसके कारण गैस और हवा का ज्वलनशील मिश्रण बनने की संभावना है।

किसी चिंगारी या आग के स्रोत के संपर्क में आने के बाद इस मिश्रण में विस्फोट हो सकता है।

पुलिस ने बताया कि जिस कमरे में घटना हुई, वह चारों ओर से बंद था। कमरे में हवा के आवागमन के लिए पर्याप्त खुली जगह नहीं थी।

हालांकि, गैस रिसाव और विस्फोट की वास्तविक वजह की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

नजफगढ़ थाने में FIR दर्ज

इस मामले में नजफगढ़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 और 106(1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

ये धाराएं आग या ज्वलनशील पदार्थों के संबंध में लापरवाही और लापरवाही के कारण मौत होने से संबंधित हैं।

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गैस रिसाव किस कारण हुआ और क्या सुरक्षा संबंधी किसी लापरवाही ने दुर्घटना को गंभीर बनाया।

गैस रिसाव होने पर बरतें विशेष सावधानी

घरेलू एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते समय कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद आवश्यक है। गैस की गंध आने पर चूल्हा, माचिस या लाइटर नहीं जलाना चाहिए।

ऐसी स्थिति में बिजली के स्विच भी नहीं छूने चाहिए, क्योंकि चिंगारी से आग लगने का खतरा रहता है।

यदि सुरक्षित हो तो गैस रेगुलेटर बंद करें, दरवाजे और खिड़कियां खोलें तथा सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं।

गैस रिसाव की शिकायत के लिए एलपीजी आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 1906 पर संपर्क किया जा सकता है।

एक हादसे ने बदल दी पूरे परिवार की जिंदगी

नजफगढ़ के रामजी लाल के परिवार के लिए 22 सितंबर की रात कभी न भूलने वाली त्रासदी बन गई।

एक गैस रिसाव के संदिग्ध हादसे में परिवार के चार सदस्यों की जान चली गई। तीन महीने का युवांश माता-पिता के प्यार से वंचित हो गया, जबकि चार वर्षीय दिया ने अपनी मां को खो दिया।

इस घटना ने घरेलू गैस सुरक्षा और बंद कमरों में गैस रिसाव से होने वाले खतरों की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया है।

फिलहाल पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है। जांच के निष्कर्ष से यह स्पष्ट हो सकेगा कि गैस रिसाव कैसे हुआ और इस भीषण हादसे के पीछे किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

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