नई दिल्ली: नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन 36 दिनों तक देशभर में चर्चा का केंद्र बना रहा। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों तक पहुंच गया। इस दौरान भूख हड़ताल, पुलिस कार्रवाई, ‘चलो संसद’ मार्च और सरकार से बातचीत जैसे कई बड़े घटनाक्रम सामने आए। इस आंदोलन में कई ऐसे दिन रहे, जिन्हें CJP के संघर्ष के इतिहास में महत्वपूर्ण माना गया। प्रदर्शन की शुरुआत से लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक कई घटनाओं ने आंदोलन को नई दिशा दी।
6 जून: जंतर-मंतर से आंदोलन की शुरुआत
CJP ने 6 जून को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में अपना पहला प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। शुरुआत में सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा रूप लेने लगा।
11 जून: पांच सूत्रीय घोषणापत्र जारी
आंदोलन के पांच दिन बाद 11 जून को CJP ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर पांच सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया। इसमें परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, छात्रों की समस्याओं के समाधान और शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की मांगों को प्रमुखता दी गई।
20 जून: अनिश्चितकालीन धरना शुरू
जब प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो CJP ने 20 जून को आंदोलन तेज कर दिया। जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। इसके बाद आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने लगा और बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन से जुड़ने लगे।
28 जून: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल
आंदोलन को उस समय बड़ा समर्थन मिला, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून को प्रदर्शन स्थल पहुंचे और उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनकी भागीदारी के बाद आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया।
18 जुलाई: स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया
करीब तीन सप्ताह तक भूख हड़ताल जारी रखने के बाद 18 जुलाई को सोनम वांगचुक की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि यह कदम स्वास्थ्य स्थिति और अदालत के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था।
20 जुलाई: ‘चलो संसद’ मार्च और तनाव
आंदोलन का सबसे बड़ा घटनाक्रम 20 जुलाई को सामने आया, जब हजारों प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल हुए। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई। प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ने पर पुलिस ने कार्रवाई की।
बताया गया कि स्थिति को देखते हुए संसद परिसर की सुरक्षा बढ़ाई गई और लंबे समय बाद संसद के द्वार बंद करने पड़े। इसी दिन CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों को दोहराया।
21 से 24 जुलाई: सरकार से बातचीत और आंदोलन में बदलाव
21 जुलाई को सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। इस दौरान कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।
23 और 24 जुलाई को वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर युवाओं को भरोसा दिलाया कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी और परीक्षा प्रणाली में सुधार किए जाएंगे।
24 जुलाई को आंदोलन का असर देश के कई शहरों में देखने को मिला। पटना, मुंबई समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए। इसी दिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने की जानकारी दी।
25 जुलाई: आंदोलन की बड़ी सफलता
36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद 25 जुलाई को CJP को बड़ी सफलता मिलने का दावा किया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह मांग आंदोलन की शुरुआत से ही प्रमुख मुद्दों में शामिल थी।
CJP आंदोलन ने नीट परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी। 36 दिनों के इस संघर्ष में धरना, भूख हड़ताल, मार्च और सरकारी स्तर पर बातचीत जैसे कई चरण देखने को मिले। अब आंदोलन के बाद शिक्षा व्यवस्था में होने वाले बदलावों और सरकार की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।