New Delhi नई दिल्ली : भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार लगातार तेजी से बढ़ रहा है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) देश में ऑनलाइन लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि यूपीआई प्लेटफॉर्म से अब तक 55.49 करोड़ से अधिक यूजर जुड़ चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के माध्यम से रिकॉर्ड स्तर पर लेनदेन दर्ज किए गए हैं।
लोकसभा में एक लिखित जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूपीआई के जरिए कुल 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए। इन डिजिटल लेनदेन की कुल राशि 314.23 लाख करोड़ रुपये रही। सरकार के अनुसार, पिछले पांच वित्त वर्षों में यूपीआई के उपयोग में लगातार तेज वृद्धि दर्ज की गई है और देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है।
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि यूपीआई ने देश में भुगतान के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां लोग नकद लेनदेन पर अधिक निर्भर रहते थे, वहीं अब मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान करना आसान हो गया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
सरकार की ओर से संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई लेनदेन की संख्या और कुल राशि दोनों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। डिजिटल इंडिया अभियान, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और इंटरनेट सुविधाओं के विस्तार ने यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं की ओर से आसान और सुरक्षित डिजिटल भुगतान सुविधाएं उपलब्ध कराने से भी लोगों का भरोसा बढ़ा है।
यूपीआई की शुरुआत देश में डिजिटल भुगतान को आसान बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसका संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से किया जाता है। यूपीआई के माध्यम से लोग बैंक खाते से सीधे दूसरे व्यक्ति या व्यापारी को पैसे भेज सकते हैं। इसके लिए केवल मोबाइल नंबर, यूपीआई आईडी या क्यूआर कोड की जरूरत होती है।
पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई का इस्तेमाल केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका विस्तार हुआ है। किराना दुकानों, सब्जी विक्रेताओं, छोटे व्यापारियों और स्थानीय सेवाओं में भी यूपीआई भुगतान आम हो चुका है। इससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
सरकार का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है और इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है। यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन ने लोगों को नकदी रखने की जरूरत को कम किया है। साथ ही भुगतान प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का यूपीआई मॉडल दुनिया के कई देशों के लिए भी उदाहरण बन रहा है। इसकी सफलता का कारण इसकी सरल प्रक्रिया, कम लागत और व्यापक पहुंच है। आने वाले समय में यूपीआई के उपयोगकर्ताओं और लेनदेन की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
केंद्र सरकार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई पहल कर रही है। यूपीआई के जरिए छोटे से छोटे भुगतान को भी आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है। संसद में पेश किए गए आंकड़े यह बताते हैं कि भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़ रहा है और यूपीआई इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।