एंटी-पेपर लीक बिल पर जितेंद्र सिंह का बड़ा बयान

Update: 2026-07-28 10:48 GMT

नई दिल्ली : लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पेपर लीक, संगठित परीक्षा घोटालों और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी और परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में बनाया गया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, लेकिन बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इसमें और मजबूती की आवश्यकता महसूस हुई। इसी उद्देश्य से सरकार संशोधन विधेयक लेकर आई है।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों की मेहनत और उनके भविष्य को प्रभावित करती हैं। एक छात्र वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करता है, लेकिन जब प्रश्नपत्र लीक हो जाता है तो उसका विश्वास पूरी व्यवस्था से उठ जाता है। इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने और अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले ऐसे मामलों में उतनी कठोर कार्रवाई नहीं हो पाती थी, लेकिन अब सरकार ने इस दिशा में सख्त रुख अपनाया है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि नया संशोधन विधेयक परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद करेगा। इसके माध्यम से परीक्षा माफिया, संगठित गिरोह और अनुचित तरीकों का इस्तेमाल करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि योग्य और मेहनती छात्रों को उनका उचित अवसर मिले।

लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की समस्या नई नहीं है और पहले भी कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2009 में रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक और 2012 में एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक जैसे मामले कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सामने आए थे। उन्होंने कहा कि उस समय ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है और सरकार समय-समय पर आवश्यक कदम उठा रही है। डिजिटल तकनीक, बेहतर निगरानी व्यवस्था और सख्त कानूनी प्रावधानों के माध्यम से परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा से जुड़ी परीक्षाओं में लाखों युवा शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल कानून में बदलाव नहीं बल्कि युवाओं के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विवाद सामने आए हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कई कदम उठाए हैं।

लोकसभा में पेश किए गए इस संशोधन विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस जारी है। सरकार जहां इसे छात्रों के हितों की रक्षा करने वाला कानून बता रही है, वहीं विपक्ष की ओर से भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि चर्चा के बाद विधेयक किस रूप में पारित होता है और इसके प्रावधान परीक्षा व्यवस्था को कितना मजबूत बना पाते हैं।

Tags:    

Similar News