नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली परीक्षा सुधार समिति पर बोले कार्ति चिदंबरम,
Delhi दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा सुधारों के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने के ऐलान पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले के बाद साल 2024 में भी इसी तरह की एक समिति बनाई गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनाई जा रही नई समिति को लेकर अब देखना होगा कि यह किस दिशा में काम करती है और इसके क्या परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि पहले गठित समिति की सिफारिशों और रिपोर्ट की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
कार्ति चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल समिति बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यावहारिक बदलाव और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई पावर टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की है। इस समिति का उद्देश्य परीक्षा संचालन में सुधार, तकनीकी सुरक्षा मजबूत करना और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं और परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए कानूनी एवं तकनीकी स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। नीट समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। विपक्षी दल लगातार सरकार से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
अब नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति से परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि समिति की सिफारिशों को समय पर लागू करना और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण होगा।