नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई से परेशान है, लेकिन सरकार को आम लोगों की समस्याओं की चिंता नहीं है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार केवल वोट चोरी करना जानती है। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली इंडिया गठबंधन की 'वोट बचाओ, देश बचाओ' महारैली में शामिल होने की अपील की है।
महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार, 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने त्योहारों के मौसम में बढ़ती महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम लोग आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने में लगी हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश में बड़े पैमाने पर वोट चोरी हुई है और यह सिलसिला अब भी जारी है।हालांकि, वोट चोरी के ये आरोप कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक दावे हैं। इनसे संबंधित सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों भारतीयों के मतदान के संवैधानिक अधिकार को खतरा पैदा हो रहा है।खड़गे ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री पर भी आरोप लगाए कि उनके निर्देशों पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की।इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से संबंधित 2023 के कानून के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसे निरस्त करने की मांग दोहराई।
SIR प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग
खड़गे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने और नए नाम जोड़ने से संबंधित अनियमितताएं सामने आई हैं।उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6 के 16.18 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। इसके अलावा पीलीभीत में 10,470 मतदाता रिकॉर्ड में अनियमितताओं का आरोप भी लगाया।खड़गे ने कहा कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें मतदाता सूची में वापस शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनावों में पेपर बैलेट की व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली
इंडिया गठबंधन ने 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' नाम दिया गया है।कांग्रेस अध्यक्ष ने लोगों से इस रैली में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि विपक्ष इस आंदोलन को संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जोड़कर देखता है।इंडिया गठबंधन के नेता इस रैली के माध्यम से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी सुधारों से जुड़ी अपनी मांगें उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
दिल्ली के व्यापारियों ने रैली टालने की मांग की
इस बीच दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रैली की तारीख को लेकर चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने त्योहारों के दौरान बाजारों में होने वाली भीड़ और कारोबार पर संभावित असर को देखते हुए कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की है।व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान के आसपास कई प्रमुख थोक और खुदरा बाजार हैं। रैली के कारण यातायात प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था से ग्राहकों तथा व्यापारियों को परेशानी हो सकती है।संगठन ने कार्यक्रम को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने का सुझाव दिया है। हालांकि, विपक्षी गठबंधन की ओर से फिलहाल 1 नवंबर की तारीख पर ही रैली आयोजित करने की तैयारी है।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार मतदाता सूची तथा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, इन आरोपों का तथ्यात्मक परीक्षण चुनाव आयोग के रिकॉर्ड, संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।खड़गे के ताजा बयान ने इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की महारैली पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर रहेगी।