नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि उनके बयान लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। खड़गे ने सवाल उठाया है कि मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को लेकर किए जा रहे दावों के समर्थन में क्या ठोस आंकड़े उपलब्ध हैं।यह विवाद SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और उन नामों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप से जुड़ा है। कांग्रेस का कहना है कि पात्र भारतीय नागरिकों को गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत पात्रता और दर्ज विवरणों का सत्यापन किया जाता है।
SIR और घुसपैठ के मुद्दे पर बढ़ा विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें SIR के तहत मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को लेकर घुसपैठ का मुद्दा उठाया गया था। खड़गे के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और किसी व्यक्ति के विदेशी नागरिक होने के बीच अंतर है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन दोनों विषयों को जोड़कर जनता के सामने भ्रम पैदा किया जा रहा है।कांग्रेस का सवाल है कि अगर मतदाता सूची से हटाए गए लोगों में घुसपैठिए शामिल हैं, तो उनकी पहचान से जुड़े स्पष्ट आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए। पार्टी ने यह भी जानना चाहा है कि पुनरीक्षण के दौरान कितने लोगों को विदेशी नागरिक के रूप में चिह्नित किया गया और कितने मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।
कांग्रेस ने आंकड़ों को लेकर उठाए सवाल
SIR को लेकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी गृह मंत्री से सवाल पूछे थे। पार्टी ने जानना चाहा कि पुनरीक्षण के दौरान कितने घुसपैठियों की पहचान हुई, कितने लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और कितने लोगों को देश से निर्वासित किया गया। कांग्रेस का कहना है कि इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने से मामले की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मतदाता सूची से नाम हटने के सभी मामलों को घुसपैठ से जोड़ना उचित नहीं है। नाम हटने के पीछे मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाना, एक से अधिक जगह नाम दर्ज होना या पात्रता से संबंधित अन्य कारण भी हो सकते हैं। किसी व्यक्ति की नागरिकता या कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप
इस मुद्दे पर भाजपा ने भी कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है और पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करना है। भाजपा ने कांग्रेस पर SIR को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप भी लगाया है।दूसरी ओर, कांग्रेस लगातार यह मांग कर रही है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटाया जाए। पार्टी का जोर इस बात पर है कि चुनावी व्यवस्था में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
मतदाता सूची की पारदर्शिता बना प्रमुख मुद्दा
SIR को लेकर जारी विवाद ने मतदाता सूची की शुद्धता, नागरिकता से जुड़े दावों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। इस मामले में सरकारी दावों, चुनाव आयोग के आंकड़ों और विपक्ष की आपत्तियों का अलग-अलग आकलन महत्वपूर्ण है।फिलहाल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है। अब इस बहस में आंकड़ों और आधिकारिक स्पष्टीकरण की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि मतदाता सूची से नाम हटाने के पीछे क्या कारण रहे और घुसपैठ से संबंधित दावों का वास्तविक आधार क्या है।
Tags: