1 नवंबर की रैली से पहले खड़गे का बड़ा बयान, वोट के अधिकार पर जताई चिंता
नई दिल्ली। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित INDIA गठबंधन की महारैली से पहले मतदान के अधिकार और लोकतंत्र की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। खड़गे ने कहा कि यह सुनिश्चित करना होगा कि दिल्ली में बैठा कोई भी व्यक्ति नागरिकों के मतदान के अधिकार को न छीन सके। उन्होंने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि देश में मतदाताओं के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसकी रक्षा करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है। खड़गे के इस बयान को 1 नवंबर की प्रस्तावित 'वोट बचाओ-देश बचाओ' महारैली से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके माध्यम से कांग्रेस और INDIA गठबंधन चुनावी व्यवस्था में सुधार तथा मतदाता सूची की पारदर्शिता का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
मतदान के अधिकार को लेकर खड़गे ने जताई चिंता
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में जनता की सबसे बड़ी ताकत उसका वोट है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।खड़गे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता लोकतंत्र में जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती है। पार्टी ने मांग की है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को वैधानिक और निर्धारित नियमों के अनुरूप बताया है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली
कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम का नाम 'वोट बचाओ-देश बचाओ' रखा गया है।कांग्रेस अध्यक्ष ने 26 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश के नागरिकों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यह आंदोलन केवल मतदान के अधिकार का मुद्दा नहीं, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है।खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया।
चुनाव आयोग के खिलाफ तीन प्रमुख मांगें
INDIA गठबंधन ने चुनावी व्यवस्था को लेकर तीन प्रमुख मांगें सामने रखी हैं।पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने की है।दूसरी मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया रोकने और कथित रूप से गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने की है।तीसरी मांग भविष्य के चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय मतपत्रों का इस्तेमाल करने की है।कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने पीलीभीत में 10,470 मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े खड़गे द्वारा लगाए गए आरोपों का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
खड़गे बोले- चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ जारी रहेगा आंदोलन
29 अक्टूबर को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ कांग्रेस का विरोध जारी रहेगा।उन्होंने भाजपा को मतपत्रों के माध्यम से चुनाव कराने की चुनौती भी दी। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगी।कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में भाजपा और जनता दल सेक्युलर की जीत से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ चुनावी परिणामों के आधार पर मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग समाप्त नहीं की जा सकती।उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस देशभर में चुनावी अनियमितताओं के अपने आरोपों को जनता के सामने रखती रहेगी।
दिल्ली पुलिस ने रैली के लिए दी अनुमति
दिल्ली पुलिस ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली के आयोजन के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया है।दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, आयोजकों ने पहले दिल्ली नगर निगम से मैदान की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त की थी। इसके बाद सुरक्षा और कानून व्यवस्था से संबंधित आवश्यकताओं का आकलन करके अनुमति दी गई।रैली के दौरान यातायात व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।
व्यापारियों ने रैली की तारीख बदलने की उठाई थी मांग
इस बीच दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने त्योहारों के दौरान प्रस्तावित रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रामलीला मैदान के आसपास कई प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं।व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने रैली के कारण यातायात प्रतिबंध और बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई थी।संगठन ने कांग्रेस नेतृत्व से रैली की तारीख बदलने का अनुरोध भी किया था। हालांकि, कांग्रेस ने 1 नवंबर को ही कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा बरकरार रखी है।
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी चुनावी पारदर्शिता पर बहस
मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान के बाद मतदान के अधिकार, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।कांग्रेस और INDIA गठबंधन इन मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा से जोड़ रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं की वैधानिकता का पक्ष रख चुका है।अब 1 नवंबर की रैली में विपक्षी नेताओं के संबोधनों और उनकी आगामी रणनीति पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष किन नए तथ्यों और मांगों को सामने रखता है।