Delhi सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग और अन्य को एक नोटिस जारी किया। यह नोटिस कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और नौ अन्य विपक्षी नेताओं की एक याचिका पर जारी किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं और 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायमूर्ति सूर्य कांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से इस याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में चल रही SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई है।
पीठ ने इस मामले को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया। CJI ने कहा, "नोटिस जारी करें। लेकिन उससे पहले एक आपत्ति है... हम अगली सुनवाई की तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में पूछना चाहेंगे। नोटिस जारी करने का मतलब यह नहीं है कि हम किसी चीज़ की निंदा कर रहे हैं। हम नोटिस जारी कर रहे हैं... लेकिन एक याचिकाकर्ता के मामले में, हम निश्चित रूप से इस मुद्दे पर विचार करेंगे। एक याचिकाकर्ता के संबंध में नोटिस को इस शर्त पर स्वीकार किया जाएगा कि वह अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण दें।"
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए। पीठ ने AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर भी नोटिस जारी किया। राहुल गांधी और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट से एक समिति गठित करने की मांग की गई है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें और इसमें तकनीकी विशेषज्ञ तथा अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हों। यह समिति SIR के तहत हटाए गए नामों और मतदाता सूची डेटाबेस तक पहुंच की जांच (ऑडिट) करे, साथ ही वैश्विक स्तर पर अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आधार पर EVM से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा करे।