नई दिल्ली। राजधानी में फायर सेफ्टी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब इमारतों और परिसरों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (FSC) जारी करने की प्रक्रिया में थर्ड-पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को भी शामिल किया जाएगा। दिल्ली सरकार ने इसके लिए योग्य ऑडिटर्स के पंजीकरण और पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दिल्ली अग्निशमन विभाग (DFS) ने इस संबंध में आवेदन आमंत्रित करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत योग्य और अनुभवी फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को अधिकृत किया जाएगा, जो भवनों का निरीक्षण करने के बाद निर्धारित मानकों के आधार पर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी कर सकेंगे।
अब तक फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार केवल दिल्ली अग्निशमन विभाग के पास था। लेकिन हाल के दिनों में राजधानी में हुई कई बड़ी आग की घटनाओं के बाद सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला लिया है। खासतौर पर हौज रानी स्थित होटल में लगी आग में 22 लोगों की मौत के बाद फायर सेफ्टी नियमों को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई।
दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित डीएफएस संशोधन नियम-2025 के तहत थर्ड-पार्टी ऑडिटर्स को जिम्मेदारी दी जाएगी। इन ऑडिटर्स का चयन उनकी योग्यता, अनुभव और तकनीकी क्षमता के आधार पर किया जाएगा।
नए नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को तीन श्रेणियों एल-1, एल-2 और एल-3 में पंजीकृत किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता और अनुभव निर्धारित किए गए हैं। बीई या बीटेक (फायर सेफ्टी), नेशनल फायर सर्विस कॉलेज नागपुर से सब-ऑफिसर कोर्स, सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या आर्किटेक्चर में डिग्री और फायर एंड लाइफ सेफ्टी ऑडिट में पीजी डिप्लोमा जैसी योग्यताएं जरूरी होंगी।
इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में एक से दस वर्ष तक का अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है। एल-1 और एल-2 श्रेणी के ऑडिटर 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों का निरीक्षण कर सकेंगे, जबकि एल-3 श्रेणी के ऑडिटर सभी प्रकार की इमारतों और परिसरों के लिए अधिकृत होंगे।
ऑडिटर्स का पंजीकरण तीन वर्ष के लिए मान्य रहेगा। इसके लिए सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए शुल्क भी तय किया है। एल-1 श्रेणी के लिए पंजीकरण शुल्क 10 हजार रुपये, एल-2 के लिए 20 हजार रुपये और एल-3 के लिए 30 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत भवन मालिक या कब्जाधारी दिल्ली अग्निशमन विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध पैनल से अपनी जरूरत के अनुसार ऑडिटर का चयन कर सकेंगे। ऑडिटर भवन का निरीक्षण करने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। यदि भवन सभी निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों को पूरा करता है तो वह फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करेगा।
ऑडिटर अपनी सेवाओं के लिए भवन मालिक से शुल्क भी ले सकेंगे। सरकार ने इसकी अधिकतम सीमा तय कर दी है। एल-1 श्रेणी के ऑडिटर के लिए सेवा शुल्क 10 हजार से 50 हजार रुपये तक होगा। वहीं एल-2 श्रेणी के लिए 35 हजार से 90 हजार रुपये और एल-3 श्रेणी के लिए 63 हजार रुपये से अधिकतम पांच लाख रुपये तक शुल्क निर्धारित किया गया है।
शुल्क भवन की ऊंचाई, कुल निर्मित क्षेत्र, भवन के उपयोग और वहां मौजूद फायर सेफ्टी सिस्टम की जटिलता के आधार पर तय किया जाएगा।
दिल्ली सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से फायर सेफ्टी जांच प्रक्रिया तेज होगी और भवनों में सुरक्षा मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही अग्निशमन विभाग पर काम का दबाव भी कम होगा और ज्यादा से ज्यादा इमारतों की नियमित जांच संभव हो सकेगी।