प्याज की कीमतों ने बिगाड़ा रसोई का बजट, दिल्ली में ₹53 तो मुंबई में ₹58 किलो
नई दिल्ली। हर घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार की ओर से दाम नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सरकारी एजेंसियों के जरिए मोबाइल वैन और चुनिंदा आउटलेट पर रियायती दरों में प्याज बेचा जा रहा है, लेकिन खुले खुदरा बाजार में कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई, कोलकाता और चेन्नई तक प्रमुख महानगरों में प्याज के भाव ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाया है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 22 सितंबर को देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 54.20 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। अलग-अलग शहरों और बाजारों में कीमतों में बड़ा अंतर भी देखने को मिला। कुछ जगह प्याज 100 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम कीमत 29 रुपये प्रति किलो रही।
दिल्ली में ₹53 किलो प्याज
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्याज का खुदरा भाव 53 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। यह कीमत सरकार की ओर से रियायती दर पर उपलब्ध कराए जा रहे प्याज से काफी अधिक है।
प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है। भारतीय भोजन में प्याज का व्यापक इस्तेमाल होने के कारण इसकी कीमत में कुछ रुपये की बढ़ोतरी भी महीने के घरेलू खर्च को प्रभावित कर सकती है।
मुंबई में ₹58 प्रति किलो पहुंचा भाव
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्याज दिल्ली से भी महंगा रहा। यहां खुदरा बाजार में इसकी कीमत 58 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
बड़े शहरों में मंडी से खुदरा बाजार तक प्याज पहुंचने के दौरान परिवहन, भंडारण और वितरण से जुड़ी लागत भी अंतिम कीमत पर असर डालती है। अलग-अलग इलाकों में गुणवत्ता और दुकान के आधार पर कीमतों में अंतर भी हो सकता है।
कोलकाता और चेन्नई में ₹60 किलो
प्रमुख महानगरों में कोलकाता और चेन्नई में प्याज का भाव सबसे ज्यादा 60 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। यानी इन दोनों महानगरों में एक किलो प्याज के लिए उपभोक्ताओं को दिल्ली के मुकाबले करीब सात रुपये ज्यादा खर्च करने पड़े।
खुदरा बाजार में लगातार ऊंचे दाम रहने के कारण उपभोक्ताओं की नजर अब आने वाले दिनों की कीमतों पर टिकी हुई है।
देश का औसत भाव ₹54.20 किलो
22 सितंबर को देशभर में प्याज का औसत खुदरा भाव 54.20 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। हालांकि यह राष्ट्रीय औसत है और अलग-अलग राज्यों, शहरों और बाजारों में वास्तविक कीमत इससे काफी कम या ज्यादा हो सकती है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान देश में प्याज की अधिकतम खुदरा कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंची, जबकि न्यूनतम कीमत 29 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
इस तरह सबसे महंगे और सबसे सस्ते बाजार के बीच 71 रुपये प्रति किलो तक का अंतर देखने को मिला।
₹35 किलो प्याज बेच रही सरकारी एजेंसियां
बाजार में बढ़ी कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकारी एजेंसियों के जरिए 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए मोबाइल वैन और बिक्री केंद्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य उन बाजारों में उपभोक्ताओं को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराना है जहां खुदरा कीमतें काफी ऊंची हैं।
यदि किसी उपभोक्ता को बाजार में 60 रुपये किलो प्याज मिल रहा है और सरकारी बिक्री केंद्र पर वही प्याज 35 रुपये किलो उपलब्ध है तो दोनों के बीच 25 रुपये प्रति किलो का अंतर है। इससे खासकर अधिक मात्रा में प्याज खरीदने वाले परिवारों को राहत मिल सकती है।
रिटेल मार्केट में क्यों बनी हुई हैं ऊंची कीमतें?
प्याज की कीमतें केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करतीं। मंडियों में आवक, पुराने स्टॉक की उपलब्धता, भंडारण, परिवहन लागत और विभिन्न क्षेत्रों में मांग जैसे कई कारक खुदरा कीमतों को प्रभावित करते हैं।
थोक बाजार में कीमतों में बदलाव का असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में भी समय लग सकता है। यही कारण है कि सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद कई शहरों में खुदरा कीमतें तुरंत नीचे नहीं आतीं।
प्याज ऐसी फसल है जिसकी कीमतों में आपूर्ति में बदलाव होने पर अपेक्षाकृत तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
घरेलू बजट पर सीधा असर
प्याज भारतीय रसोई की प्रमुख खाद्य सामग्रियों में शामिल है। सब्जियों से लेकर दाल, ग्रेवी और सलाद तक में इसका इस्तेमाल होता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने का असर लगभग हर परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है।
अगर कोई परिवार महीने में पांच किलो प्याज इस्तेमाल करता है और कीमत 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो हो जाए तो केवल प्याज पर मासिक खर्च 150 रुपये से बढ़कर 300 रुपये हो जाता है।
होटल, रेस्तरां, ढाबों और स्ट्रीट फूड कारोबार में भी प्याज का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची कीमत रहने पर व्यावसायिक लागत पर भी असर पड़ सकता है।
सरकारी बिक्री और बाजार भाव में बड़ा अंतर
दिल्ली में खुदरा कीमत 53 रुपये और सरकारी बिक्री दर 35 रुपये होने पर अंतर 18 रुपये प्रति किलो है। मुंबई में यह अंतर 23 रुपये और कोलकाता तथा चेन्नई में 25 रुपये प्रति किलो बैठता है।
हालांकि सरकारी एजेंसियों द्वारा रियायती प्याज की उपलब्धता हर इलाके और हर दुकान पर समान नहीं होती। इसलिए खुले बाजार में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को अभी भी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
सप्लाई बढ़ने पर मिल सकती है राहत
प्याज के बाजार में आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा काफी हद तक मंडियों में नई आवक और उपलब्ध स्टॉक पर निर्भर करेगी। यदि बाजार में आपूर्ति बढ़ती है तो खुदरा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
सरकार की ओर से रियायती बिक्री बढ़ाए जाने का उद्देश्य भी बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराकर कीमतों को नियंत्रित करना है।
हालांकि उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब खुले बाजार में भी प्याज की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी।
महानगरों में प्याज का भाव
दिल्ली में प्याज 53 रुपये प्रति किलो, मुंबई में 58 रुपये और कोलकाता तथा चेन्नई में 60 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। वहीं देशभर का औसत खुदरा भाव 54.20 रुपये प्रति किलो रहा।
देश के अलग-अलग बाजारों में न्यूनतम भाव 29 रुपये और अधिकतम भाव 100 रुपये प्रति किलो तक दर्ज किया गया।
फिलहाल सरकारी एजेंसियों की 35 रुपये किलो की बिक्री उपभोक्ताओं के लिए राहत का विकल्प बनी हुई है, लेकिन खुदरा बाजार में ऊंची कीमतों के कारण आम परिवारों की चिंता बरकरार है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में आपूर्ति बढ़ने और सरकारी हस्तक्षेप का खुले बाजार की कीमतों पर कितना असर दिखाई देता है।