नई दिल्ली: देशभक्ति केवल नारों या तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं होती, बल्कि कई लोगों के लिए यह जीवन का उद्देश्य बन जाती है। ऐसे ही एक शख्स हैं जिन्हें देशभर में प्यार से 'फ्लैग अंकल' के नाम से जाना जाता है। तिरंगे के प्रति उनका समर्पण और देशभक्ति की भावना अब उनके बेटे के जरिए आगे बढ़ रही है।
इस परिवार के लिए राष्ट्रध्वज केवल कपड़े का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है। पिता से मिली सीख को बेटे ने भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया और अब वह उसी विरासत को आगे बढ़ाने में जुटा है।
पिता से मिली देशभक्ति की सीख
'फ्लैग अंकल' के लिए देशभक्ति की शुरुआत उनके पिता से हुई। बचपन से ही उन्होंने अपने परिवार में राष्ट्र और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना देखी। पिता की सोच और उनके संस्कारों ने उनके मन में देश के प्रति समर्पण की भावना मजबूत की। यही वजह रही कि आगे चलकर तिरंगा उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
तिरंगे को बनाया जीवन का मिशन
समय के साथ 'फ्लैग अंकल' की पहचान तिरंगे के प्रति उनके विशेष लगाव के कारण बनने लगी। वह लोगों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और उसकी गरिमा के प्रति जागरूक करने का प्रयास करते रहे। उनकी गतिविधियों और तिरंगे के प्रति समर्पण ने उन्हें आम लोगों के बीच अलग पहचान दिलाई।
PM मोदी ने दिया 'फ्लैग अंकल' नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके तिरंगे के प्रति समर्पण को पहचान दी। उनके इसी जुनून और लगातार किए जा रहे प्रयासों के कारण उन्हें 'फ्लैग अंकल' के नाम से संबोधित किया गया। इसके बाद यह नाम उनकी पहचान का हिस्सा बन गया और देशभर में लोग उन्हें इसी नाम से जानने लगे।
अब बेटा बढ़ा रहा विरासत
'फ्लैग अंकल' की देशभक्ति की यह कहानी अब अगली पीढ़ी तक पहुंच रही है। उनके बेटे ने भी पिता के काम और विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। वह तिरंगे के सम्मान और देशभक्ति से जुड़े संदेश को लोगों तक पहुंचाने में पिता का साथ दे रहे हैं। इस तरह परिवार की यह परंपरा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंच रही है।
पिता-पुत्र की जोड़ी बनी प्रेरणा
देशभक्ति की इस विरासत में पिता और बेटे का साथ लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन रहा है। जहां पिता ने अपनी पहचान तिरंगे के प्रति समर्पण से बनाई, वहीं बेटा उसी भावना को आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है। यह कहानी बताती है कि देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना परिवार के संस्कारों से भी अगली पीढ़ी तक पहुंच सकती है।
तिरंगे के सम्मान का संदेश
'फ्लैग अंकल' की यात्रा का एक अहम संदेश राष्ट्रध्वज के सम्मान से जुड़ा है। राष्ट्रीय ध्वज देश की संप्रभुता, एकता और गौरव का प्रतीक है। लोगों को तिरंगे के सही सम्मान और उसके महत्व के बारे में जागरूक करना उनकी मुहिम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
देशभक्ति का अलग अंदाज
आज के दौर में जहां देशभक्ति अक्सर सोशल मीडिया पोस्ट और नारों तक सीमित दिखाई देती है, वहीं 'फ्लैग अंकल' की कहानी इसे जीवन में उतारने की प्रेरणा देती है। उन्होंने तिरंगे के प्रति अपने लगाव को केवल व्यक्तिगत भावना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे लोगों तक पहुंचाने का माध्यम बनाया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
उनकी कहानी खासतौर पर युवाओं को यह संदेश देती है कि देश के प्रति प्रेम केवल किसी विशेष अवसर पर व्यक्त करने की चीज नहीं है। इसे अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों में भी शामिल किया जा सकता है।
पिता से मिली सीख को बेटे द्वारा आगे बढ़ाया जाना इस बात का उदाहरण है कि अच्छे संस्कार और सकारात्मक विचार पीढ़ियों तक कायम रह सकते हैं।
विरासत सिर्फ नाम की नहीं, विचारों की भी
'फ्लैग अंकल' की विरासत केवल उनके नाम या पहचान तक सीमित नहीं है। असली विरासत वह भावना है जो उन्होंने अपने बेटे और आसपास के लोगों में पैदा की। अब जब उनका बेटा इस मुहिम को आगे बढ़ा रहा है, तो यह कहानी एक परिवार की नहीं बल्कि देशभक्ति की उस भावना की कहानी बन गई है जो पीढ़ियों के साथ आगे बढ़ती रहती है।
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