नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में जंतर-मंतर पर बच्चों द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ बच्चे गुमराह हो गए हैं और उन्हें सही दिशा दिखाना समाज की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने देर रात अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर एक सेल्फी वीडियो साझा करते हुए इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ बच्चों ने जंतर-मंतर पर उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इन बच्चों ने ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिनमें उनकी दिवंगत मां को भी शामिल किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बचपन में गलतियां हो सकती हैं और बच्चों को सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को इस तरह के व्यवहार के लिए दोषी ठहराने के बजाय उन्हें सही मार्ग दिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार देना और उन्हें सही दिशा में ले जाना समाज और बड़ों की जिम्मेदारी है।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन सीखने और समझ विकसित करने का समय होता है। इस उम्र में बच्चे कई बार आसपास के माहौल और लोगों से प्रभावित होकर ऐसी बातें कह सकते हैं, जिन्हें बाद में समझने और सुधारने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को सकारात्मक सोच और सही मूल्यों से जोड़ना जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान उस घटना के संदर्भ में आया है, जिसमें जंतर-मंतर पर कुछ बच्चों द्वारा कथित रूप से उनके खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में व्यक्तिगत पीड़ा का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वह बच्चों को लेकर नकारात्मक सोच नहीं रखते, बल्कि उन्हें भविष्य का आधार मानते हैं। उनका कहना था कि बच्चों को भटकाव से निकालकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों को केवल उनके किसी एक व्यवहार के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनके भविष्य और सुधार की संभावना को ध्यान में रखना चाहिए।
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब सार्वजनिक संवाद और राजनीतिक विरोध के तरीकों को लेकर चर्चा तेज है। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं, सार्वजनिक व्यक्तियों और आम लोगों के बीच होने वाली बातचीत तेजी से लोगों तक पहुंचती है। ऐसे में भाषा और व्यवहार को लेकर भी बहस होती रहती है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपने बयान के माध्यम से घटना पर प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ बच्चों के प्रति एक संतुलित रुख अपनाने का संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने आलोचना के जवाब में संयम और सुधार की बात पर जोर दिया।
इस मामले को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों ने बच्चों के व्यवहार की आलोचना की, जबकि कुछ ने बच्चों को प्रभावित करने वाले सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर चर्चा की। वहीं, प्रधानमंत्री के बयान के बाद बच्चों के संस्कार, सार्वजनिक भाषा और राजनीतिक संवाद की मर्यादा जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि बच्चों को सही दिशा देने का काम सभी का है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को सकारात्मक विचारों, अच्छे संस्कारों और जिम्मेदार व्यवहार की ओर बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि गलतियों को सुधारने का अवसर देना चाहिए और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, किसी भी बच्चे को स्थायी रूप से गलत नहीं माना जा सकता, बल्कि उसे बेहतर मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।
फिलहाल जंतर-मंतर की घटना और प्रधानमंत्री के बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें उन्होंने घटना का उल्लेख करते हुए बच्चों को सुधारने और सही दिशा दिखाने की जिम्मेदारी पर जोर दिया है।