नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सोमवार, 2 नवंबर 2026 को राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 'भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026' का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, पीएम मोदी शाम करीब 4:30 बजे कार्यक्रम का उद्घाटन करने के साथ उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित भी करेंगे। चार दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और 40 से अधिक मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश, नई तकनीकों के विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित यह सम्मेलन 2 से 5 नवंबर तक चलेगा।

इस बार शिखर सम्मेलन की थीम 'निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरित करें' (Invest. Innovate. Inspire.) रखी गई है। कार्यक्रम में दुनिया भर के नीति निर्माता, निवेशक, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि, उद्योगपति, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाना और ऐसी तकनीकों को प्रोत्साहित करना है, जो भविष्य में ऊर्जा की बढ़ती मांग पूरी करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकें।

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 2 नवंबर को शाम लगभग 4:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत मंडपम पहुंचकर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद उनका संबोधन निर्धारित है। अगले तीन दिनों तक विभिन्न विषयों पर उच्चस्तरीय बैठकें, मंत्रिस्तरीय चर्चाएं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद और तकनीकी प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। सम्मेलन का समापन 5 नवंबर को होगा।

इस आयोजन में ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम भागीदार के रूप में हिस्सा लेंगे। इन देशों के प्रतिनिधि भारत के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

सम्मेलन में भारत के 13 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तथा निवेश के अवसरों को प्रदर्शित करेंगे। इनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। ये राज्य अपने यहां उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, ऊर्जा परियोजनाओं, औद्योगिक संभावनाओं और विनिर्माण क्षमताओं की जानकारी निवेशकों के सामने रखेंगे।

छत्तीसगढ़ की भागीदारी भी इस आयोजन में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य में सौर ऊर्जा, औद्योगिक ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं से संबंधित संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि निवेश आकर्षित करने और तकनीकी साझेदारी विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की एक बड़ी विशेषता यह है कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की नौवीं सभा और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। इन तीनों मंचों के माध्यम से सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा वित्तपोषण और नई तकनीकों को लेकर व्यापक चर्चा होगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की बैठक में सदस्य देशों के बीच सौर ऊर्जा के विस्तार, वित्तीय सहायता और संस्थागत क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। वहीं ग्रीन हाइड्रोजन सम्मेलन में इसके उत्पादन, उपयोग, निवेश और व्यावसायिक विस्तार से संबंधित संभावनाओं पर चर्चा होगी।

एक्सपो में 400 से अधिक प्रदर्शकों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें देश-विदेश की कंपनियां, प्रौद्योगिकी प्रदाता, विनिर्माण संस्थान, स्टार्टअप और शोध संगठन शामिल होंगे। प्रदर्शनी में सौर पैनल, पवन ऊर्जा उपकरण, ऊर्जा भंडारण प्रणालियां, ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक और अन्य आधुनिक स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को प्रदर्शित किया जाएगा।

सम्मेलन में केवल सरकारी प्रतिनिधियों की बैठकें ही नहीं होंगी, बल्कि निजी कंपनियों और निवेशकों के बीच कारोबारी बातचीत का भी अवसर मिलेगा। इसके लिए बिजनेस-टू-बिजनेस, बिजनेस-टू-गवर्नमेंट और गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट बैठकों की व्यवस्था की गई है। इन बैठकों के माध्यम से नई परियोजनाओं, निवेश प्रस्तावों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 308 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। देश ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मंत्रालय का अनुमान है कि इस लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए वर्ष 2027 से 2030 के बीच लगभग 220 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल नई सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। ऊर्जा भंडारण प्रणालियों, बिजली पारेषण नेटवर्क, घरेलू विनिर्माण और नई तकनीकों में भी बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत होगी। सम्मेलन में इन्हीं चुनौतियों और उनके समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

युवाओं और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए भी आयोजन में विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं। भारत रिन्यूएबल एनर्जी हैकाथॉन 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा क्विज का ग्रैंड फिनाले आयोजित होगा। 'REGen Pavilion' में विद्यार्थी, युवा उद्यमी, शोधकर्ता और नवाचार से जुड़े लोग अपने विचार तथा तकनीकी समाधान प्रस्तुत कर सकेंगे।

भारत सरकार इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रही है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमता और निवेश की संभावनाओं को देखते हुए कई विदेशी कंपनियों तथा वित्तीय संस्थानों की भागीदारी महत्वपूर्ण हो सकती है।

फिलहाल सभी की नजरें आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन संबोधन पर रहेंगी। चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में निवेश, नई तकनीक, हरित हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा से संबंधित चर्चाएं होंगी। सम्मेलन के दौरान सामने आने वाले प्रस्तावों और साझेदारियों से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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