नई दिल्ली: दिल्ली के जहांगीरपुरी और शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशनों पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखने के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपियों ने प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस यानी एसएफजे से जुड़े हैंडलरों के निर्देश पर यह काम किया। इसके बदले उन्हें बड़ी रकम देने का वादा किया गया था। पुलिस ने रविवार, 1 नवंबर को गिरफ्तारी की जानकारी दी। 
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरियाणा के पानीपत निवासी सुमीत उर्फ रफ्तार, उम्र 30 वर्ष, पंजाब निवासी सुमित कुमार उर्फ काका, उम्र 22 वर्ष और गुरप्रीत, उम्र 22 वर्ष के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, 29 अक्टूबर को जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास खालिस्तान समर्थक नारे मिले थे। अगले दिन शास्त्री नगर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर दो के पास सीढ़ियों की अंदरूनी दीवार पर भी इसी तरह के नारे मिले। दोनों घटनाओं के संबंध में मेट्रो पुलिस थानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गईं। इसके बाद स्पेशल सेल ने मामले की जांच संभाली। तकनीकी विश्लेषण की मदद से जांचकर्ता समालखा में सुमीत तक पहुंचे। उससे पूछताछ के बाद अन्य दोनों आरोपियों की पहचान हुई और उन्हें पंजाब से गिरफ्तार किया गया। 
पुलिस ने सुमित कुमार को कथित योजना का मुख्य सूत्रधार बताया है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि एसएफजे से जुड़े एक हैंडलर ने उससे संपर्क कर निर्देश प्राप्त करने के लिए एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा था। इसी माध्यम से उसे नारों के नमूने भेजे गए और प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर उन्हें लिखने के बदले आर्थिक इनाम का प्रस्ताव दिया गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसने गुरप्रीत और सुमीत को साथ जोड़ा। अधिकारियों का दावा है कि सुमीत ने जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशन पर नारे लिखे, उसका वीडियो बनाया और हैंडलरों को भेज दिया। शास्त्री नगर की घटना में सुमित कुमार और गुरप्रीत की कथित भूमिका सामने आई है। पुलिस अब निर्देश देने वाले हैंडलरों, वादा किए गए भुगतान और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। एसएफजे से संपर्क और आर्थिक प्रलोभन संबंधी बातें फिलहाल पुलिस जांच के दावे हैं।
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