नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से चलाए गए छात्र आंदोलन के खत्म होने के करीब एक सप्ताह बाद शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस कर्मियों के परिवारों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिसकर्मियों के परिजनों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पुलिस अधिकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ा और कुछ कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए।
CJP ने अपनी मांगें पूरी होने का दावा करते हुए आंदोलन वापस ले लिया था। इन मांगों में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी शामिल थी। आंदोलन के दौरान दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने अपनी बात सामने रखी है।
शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक घायल दिल्ली पुलिस सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने प्रदर्शन के दौरान हुई कथित हिंसा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता पर भीड़ ने हमला किया और उनकी जान को खतरा पैदा हो गया था।
घायल SI की बेटी ने कहा, "मेरे पिता की लगभग पीट-पीटकर हत्या ही कर दी गई थी।" उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक भीड़ ने उनके पिता को खींच लिया और मंच के पास उनके साथ मारपीट की।
उन्होंने बताया कि यह घटना 25 तारीख को दोपहर करीब 2 बजे हुई थी। उनके अनुसार, हमले के बाद उनके पिता को इलाज के लिए राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल ले जाया गया, जहां वह करीब चार घंटे तक बेहोश रहे।
परिवार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया और उनके साथ हिंसक व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्हें भीड़ के आक्रोश का सामना करना पड़ा।
हालांकि, इस पूरे मामले में प्रदर्शन आयोजकों की ओर से अब तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। CJP ने इससे पहले अपने आंदोलन को छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाया गया विरोध बताया था और मांगें पूरी होने के बाद इसे समाप्त करने की घोषणा की थी।
आंदोलन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालने में लगे पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होती है, लेकिन हिंसा की घटनाएं स्थिति को गंभीर बना देती हैं।
घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों ने मांग की है कि प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इस घटना ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन हिंसा की घटनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन लगातार चिंता जताते रहे हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले से जुड़े घटनाक्रम, वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों का कहना है कि उनके परिवारों ने इस घटना से बड़ा मानसिक और शारीरिक नुकसान झेला है। वे चाहते हैं कि मामले में जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।