नई दिल्ली : एसिड अटैक पीड़ितों को इलाज के लिए रेल यात्रा में रियायत देने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार ने ऐसे पीड़ितों को रियायती यात्रा की सुविधा देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। रेलवे बोर्ड ने भी मरीज श्रेणी के अंतर्गत किराए में छूट देने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को प्रस्तावित नीति का मसौदा छह सप्ताह के भीतर अदालत के रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है।
सरकार अब यह तय करेगी कि एसिड अटैक पीड़ितों को किराए में कितनी छूट मिलेगी, सुविधा किस प्रक्रिया के तहत दी जाएगी और उसकी वैधता कितने समय तक रहेगी। इस नीति से उन पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें इलाज और सर्जरी के लिए बार-बार बड़े शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता है।
 रेलवे बोर्ड ने दी सैद्धांतिक सहमति
केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रेलवे बोर्ड एसिड अटैक पीड़ितों को मरीज श्रेणी के अंतर्गत यात्रा रियायत देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है।
उन्होंने बताया कि पॉलिसी अभी तैयार की जा रही है। इसमें छूट पाने की पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और सुविधा की अवधि सहित विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाएगा। नीति तैयार होने के बाद इसे अदालत में पेश किया जाएगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र को छह सप्ताह के भीतर ड्राफ्ट पॉलिसी जमा करने को कहा। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
 मौजूदा मरीज श्रेणी में कई व्यावहारिक दिक्कतें
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि रेलवे की मौजूदा मरीज श्रेणी के तहत मिलने वाली रियायत की कुछ सीमाएं हैं। आमतौर पर छूट किसी निश्चित स्टेशन से एक खास अस्पताल या गंतव्य तक की यात्रा से जुड़ी होती है।
एसिड अटैक से बचे लोगों को इलाज के अलग-अलग चरणों में विभिन्न शहरों और अस्पतालों की यात्रा करनी पड़ सकती है। शुरुआती उपचार के बाद भी उन्हें प्लास्टिक सर्जरी, आंखों के इलाज, त्वचा प्रत्यारोपण, फिजियोथेरेपी और नियमित जांच के लिए लंबे समय तक अस्पताल जाना पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि हर बार अलग-अलग अस्पतालों से रियायत का प्रमाणपत्र लेना पीड़ितों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकता है। हमले के शुरुआती महीनों में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में दस्तावेज जुटाने और टिकट की व्यवस्था करने में हुई देरी उपचार को प्रभावित कर सकती है।
 इमरजेंसी टिकट कोटे की भी मांग
मामले में याचिका दायर करने वाली अतिजीवन सोसायटी ने एसिड अटैक पीड़ितों के लिए इमरजेंसी टिकट कोटे की व्यवस्था करने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि कई बार डॉक्टर कम समय की सूचना पर पीड़ित को जांच या सर्जरी के लिए बुलाते हैं। ऐसी स्थिति में कन्फर्म टिकट उपलब्ध नहीं होने से इलाज में देरी हो सकती है।
संगठन ने अदालत को बताया कि समय पर उपचार नहीं मिलने से पीड़ित की सेहत और पुनर्वास पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए किराए में रियायत के साथ तत्काल या आपातकालीन यात्रा की सुविधा पर भी विचार किया जाना चाहिए।
केंद्र ने कहा कि नीति तैयार करते समय इन व्यावहारिक पहलुओं पर विचार किया जा सकता है। सरकार प्रस्तावित ड्राफ्ट को अदालत में पेश करने से पहले अतिजीवन सोसायटी के साथ साझा करने के लिए भी सहमत हो गई है। इससे संगठन नीति पर अपने सुझाव दे सकेगा।
दिव्यांग श्रेणी के तहत छूट पर आपत्ति
केंद्र सरकार ने एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांग श्रेणी के तहत यात्रा छूट देने पर आपत्ति जताई है। सरकार का कहना है कि ऐसा करने पर दिव्यांगता की अलग-अलग श्रेणियों के बीच वर्गीकरण और अंतर करना पड़ेगा। इसलिए मरीज श्रेणी के तहत अलग व्यवस्था तैयार करना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
अब सभी की निगाहें छह सप्ताह में पेश होने वाली ड्राफ्ट पॉलिसी पर टिकी हैं। नीति लागू होने पर एसिड अटैक पीड़ितों को इलाज के लिए लंबी दूरी की यात्रा में आर्थिक और व्यावहारिक राहत मिल सकती है।
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