नई दिल्ली। गुरुग्राम के भूमि विवाद से जुड़े मामले में रियल एस्टेट डेवलपर M3M ने दिल्ली की अदालत के आदेश को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। कंपनी का कहना है कि अदालत ने मामले में आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) से संबंधित आरोप को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में न तो कोई आरोप तय किए गए हैं और न ही मुकदमे की सुनवाई शुरू करने का कोई आदेश दिया गया है।कंपनी के इस बयान के बाद गुरुग्राम के भूमि विवाद से जुड़े कानूनी घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, कंपनी की ओर से दी गई जानकारी और अदालत के आधिकारिक आदेश के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
कंपनी ने अदालत के आदेश पर दी सफाई
M3M के अनुसार, दिल्ली की अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए विश्वासघात के आरोप को खारिज किया है। कंपनी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संबंधित मामले में उसके खिलाफ आरोप तय होने या ट्रायल शुरू होने की बात सही नहीं है।कंपनी का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति को लेकर किसी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। उसके मुताबिक, अदालत के आदेश को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जिसमें वह पारित किया गया है।
क्या है गुरुग्राम भूमि विवाद का मामला?
यह मामला गुरुग्राम में भूमि से संबंधित विवाद से जुड़ा हुआ है। ऐसे विवादों में जमीन के स्वामित्व, समझौतों, वित्तीय लेनदेन और अनुबंधों के पालन जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं। हालांकि, इस विशेष मामले में किन पक्षों के बीच क्या समझौता हुआ था और विवाद की शुरुआत किस कारण से हुई, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध बयान में नहीं दी गई है।कंपनी की ओर से जारी स्पष्टीकरण में मुख्य रूप से आपराधिक विश्वासघात के आरोप और अदालत की कार्यवाही की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की कार्यवाही जारी
अदालत के 17 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात के अपराध का संज्ञान रद्द किया गया है। हालांकि, धारा 420 के तहत धोखाधड़ी, धारा 120-बी के तहत आपराधिक साजिश और धारा 34 से संबंधित कार्यवाही जारी रहेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन पहलुओं पर पक्षकार आरोप तय करने के चरण में अपनी दलीलें रख सकते हैं।
जमीन के भुगतान को लेकर हुआ विवाद
यह विवाद एमजीएफ डेवलपमेंट्स लिमिटेड की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गुरुग्राम के चौमा गांव में लगभग 31 एकड़ जमीन के आदान-प्रदान के समझौते के तहत तय भुगतान पूरा नहीं किया गया। अभियोजन के मुताबिक, भुगतान के लिए दिए गए चेक भी अनादरित हो गए थे।दूसरी ओर, एम3एम ने विवाद को मुख्य रूप से दीवानी और व्यावसायिक प्रकृति का बताया है। कंपनी ने भुगतान और संबंधित कानूनी कार्यवाही को लेकर अपने पक्ष में दलीलें प्रस्तुत की हैं।
27 अक्टूबर को अगली पेशी
अदालत ने संबंधित पक्षों को 27 अक्टूबर 2026 को तीस हजारी अदालत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अब आरोप तय करने या आरोपमुक्त करने के प्रश्न पर आगे विचार किया जाएगा।इस प्रकार, एम3एम को आपराधिक विश्वासघात के आरोप के संबंध में राहत मिली है, लेकिन पूरे मामले का निपटारा नहीं हुआ है। धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।