मतदाता सूची विवाद पर संबित पात्रा का कांग्रेस पर निशाना, पुराने SIR अभ्यासों का दिया हवाला
नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने SIR प्रक्रिया का जोरदार बचाव करते हुए कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया कई बार आयोजित की गई थी। ऐसे में अब उसी प्रक्रिया का विरोध करना कांग्रेस की राजनीतिक मंशा पर सवाल खड़े करता है।संबित पात्रा ने दावा किया कि कांग्रेस की सरकारों के दौरान इस तरह के 10 विशेष पुनरीक्षण अभ्यास किए गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस के शासनकाल में मतदाता सूची की जांच और संशोधन की प्रक्रिया स्वीकार्य थी, तो आज भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के समय इस पर इतना विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है।भाजपा प्रवक्ता ने SIR को चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह आवश्यक है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम दर्ज हों और किसी भी तरह की त्रुटि को समय रहते सुधारा जाए।
देश में SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, ताकि गरीब, प्रवासी, बुजुर्ग और दस्तावेजों की कमी का सामना करने वाले नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न हों।वहीं भाजपा का तर्क है कि मतदाता सूची का समय-समय पर सत्यापन चुनावी व्यवस्था का सामान्य और आवश्यक हिस्सा है। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय सभी दलों को चुनाव आयोग के साथ सहयोग करना चाहिए।संबित पात्रा के बयान के बाद SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस में एक नया पहलू जुड़ गया है। भाजपा कांग्रेस के पुराने शासनकाल का उदाहरण देकर यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कोई नई व्यवस्था नहीं है।भारतीय चुनाव प्रणाली में मतदाता सूची का विशेष महत्व है। चुनाव में मतदान करने के लिए पात्र नागरिक का नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में होना आवश्यक है। निर्वाचन आयोग समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करता है, ताकि नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र पाए गए मतदाताओं की प्रविष्टियों में नियमानुसार सुधार किया जा सके।
विशेष गहन पुनरीक्षण सामान्य पुनरीक्षण से अधिक व्यापक प्रक्रिया हो सकती है। इसमें मतदाता संबंधी विवरण का सत्यापन, घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करना और आवश्यक दस्तावेजों की जांच जैसे कदम शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, प्रक्रिया की सटीक शर्तें और समयसीमा चुनाव आयोग के संबंधित आदेशों पर निर्भर करती हैं।कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि व्यापक सत्यापन के दौरान दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर कठिनाइयां सामने आ सकती हैं। विशेष रूप से ऐसे नागरिक, जो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रहते हैं या जिनके पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने में परेशानी हो सकती है।विपक्ष की मांग रही है कि चुनाव आयोग प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से न हटे। इसके लिए आपत्तियां दर्ज कराने, दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपील करने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना जरूरी माना जा रहा है।दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियों को बनाए रखना भी चुनावी निष्पक्षता के लिए उचित नहीं है। पार्टी के अनुसार, सही और अद्यतन मतदाता सूची स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की बुनियादी आवश्यकता है।
31 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि देश में कुल 12 बार SIR की प्रक्रिया हुई है, जिनमें से 10 बार कांग्रेस के शासनकाल में यह अभ्यास किया गया। हालांकि, इन सभी अभ्यासों की विस्तृत सूची की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के आधार पर नहीं की जा सकती।पात्रा ने विपक्ष के 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने संबंधी आरोपों को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि इतने बड़े पैमाने पर लोगों का मतदान अधिकार छीना गया होता, तो देशभर में व्यापक विरोध दिखाई देता। उन्होंने मृत मतदाताओं, स्थानांतरित लोगों और दोहरी प्रविष्टियों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची की सफाई को जरूरी बताया। ये आंकड़े भाजपा नेता के दावे हैं और इन्हें अंतिम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटाए गए पात्र मतदाताओं की प्रमाणित संख्या नहीं माना जाना चाहिए।भाजपा नेता ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित विपक्ष के प्रतीकात्मक कार्यक्रम की भी आलोचना की। इस कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जताया गया था। पात्रा ने इसे संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की विपक्षी रणनीति बताया।इस पूरे विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा का है। चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। ऐसे में मतदाता सूची से गलत प्रविष्टियां हटाने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी योग्य नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया के न हटाया जाए।फिलहाल SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव जारी है। संबित पात्रा के बयान से साफ है कि भाजपा अब कांग्रेस के शासनकाल में हुए पुराने पुनरीक्षण अभ्यासों को अपने बचाव का प्रमुख आधार बना रही है। दूसरी ओर विपक्ष प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण केंद्र बना रह सकता है।