नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी है। इन खातों से होने वाले खर्च और निकासी की निगरानी कलकत्ता हाई कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष अधिकारी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के तीन एचडीएफसी बैंक खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा होने की बात सामने आई है।
न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की याचिका पर सुनवाई की। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ईडी की ओर से तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ तत्काल अंतरिम राहत देने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था पार्टी के दैनिक कामकाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह टीएमसी के अलग-अलग गुटों के बीच चल रहे विवाद में हस्तक्षेप नहीं कर रही है। पीठ ने कहा कि बैंक खातों के संचालन से संबंधित मुद्दे को फिलहाल हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी की निगरानी में रखा जाएगा। जिन पक्षों को कोई आपत्ति है, वे अपनी बात विशेष अधिकारी और कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष रख सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि फ्रीज किए गए खातों में 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि है और खातों पर पूरी तरह रोक लगने से पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने कर्मचारियों को वेतन देने और अन्य जरूरी भुगतान करने में परेशानी का सामना कर रही है। सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि किसी विशेष संदिग्ध राशि की जांच की जा रही है तो उससे कहीं अधिक रकम को फ्रीज क्यों किया गया है।
वहीं, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि टीएमसी को रोजमर्रा के खर्चों के लिए खातों के संचालन की अनुमति पहले से मिली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 120 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध है। ईडी की ओर से पार्टी के भीतर चल रहे गुटीय विवाद का भी उल्लेख किया गया।
मामले में टीएमसी के बागी नेता बिस्वनाथ दास की अलग याचिका भी सामने आई थी। उनका दावा था कि वह पार्टी के वास्तविक गुट का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस राजनीतिक और संगठनात्मक विवाद में जाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मौजूदा अंतरिम व्यवस्था पार्टी के दैनिक खर्चों से जुड़ी समस्या का समाधान कर रही है, इसलिए खातों के संचालन को लेकर अंतिम फैसला मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
यह पूरा विवाद टीएमसी के तीन एचडीएफसी बैंक खातों से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल पुलिस को शिकायत मिली थी कि इन खातों में मौजूद रकम का कथित तौर पर दुरुपयोग हो सकता है। शिकायत में भ्रष्टाचार और उगाही से संबंधित रकम के शामिल होने की आशंका भी जताई गई थी। इसके बाद बैंक ने पुलिस के निर्देश पर खातों से निकासी पर पाबंदी लगाई थी। बाद में मामला प्रवर्तन निदेशालय के दायरे में पहुंच गया।
ईडी ने 23 जून को बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मूल एफआईआर के आधार पर ईसीआईआर दर्ज की। इसके बाद एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत कार्रवाई करते हुए खातों से निकासी पर रोक लगाई। ईडी का आरोप है कि इन खातों से करीब 164 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। एजेंसी इन लेनदेन की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम का स्रोत क्या था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
टीएमसी ने ईडी की कार्रवाई को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे मनमाना बताया था। पार्टी की ओर से दलील दी गई थी कि ईडी किसी विशेष अपराध से जुड़ी रकम की पहचान करने या उसे अलग करने में विफल रही है। पार्टी ने यह भी कहा था कि बड़ी रकम वाले खातों को पूरी तरह फ्रीज करने से उसके नियमित संगठनात्मक और प्रशासनिक कामकाज में बाधा उत्पन्न हो रही है।
इससे पहले 9 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने टीएमसी को तीनों खातों से दैनिक और कानूनी खर्चों के लिए सीमित राशि निकालने की अनुमति दी थी। इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया था। यह व्यवस्था 30 सितंबर तक लागू रहने की बात कही गई थी। इसके तहत टीएमसी के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता चेक पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन राशि निकालने के लिए विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर भी जरूरी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फैसले के बाद फिलहाल यही अंतरिम व्यवस्था जारी रहेगी। अदालत ने खातों को पूरी तरह संचालित करने की अनुमति नहीं दी है और न ही ईडी की कार्रवाई को रद्द किया है। अब संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां विशेष अधिकारी और कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष रख सकेंगे। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान यह तय होगा कि खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े आरोपों पर अंतिम स्थिति क्या बनती है।