नई दिल्ली। श्रद्धा वाकर हत्याकांड मामले में साकेत कोर्ट ने आरोपित आफताब अमीन पूनावाला को बड़ी राहत देते हुए उसे बचाव पक्ष की वकील के पीछे बैठने की अनुमति दे दी है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की अधिवक्ता मेघा सरोआ ने कोर्ट से अनुरोध किया था कि आफताब को उनके पीछे बैठने की अनुमति दी जाए। अदालत ने इस मांग को स्वीकार कर लिया। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से इसका विरोध किया गया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
अभियोजन पक्ष की वकील सीमा कुशवाहा ने अदालत में आपत्ति जताते हुए कहा कि आरोपित को बचाव पक्ष के वकील की डेस्क के पीछे या उसके आसपास बैठने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरवरिंदर सिंह जग्गी ने अभियोजन की दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी आरोपित को अदालत में उचित स्थान से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि किसी आरोपित के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए जिससे घृणा या बदले की भावना झलके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को दोषी तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उसका अपराध न्यायालय में साबित न हो जाए।
अदालत ने कहा कि आरोपित को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। निष्पक्ष ट्रायल के तहत आरोपित को अपने वकील से सलाह लेने और कानूनी सहायता प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। इसी आधार पर कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की आपत्ति को गैरजरूरी और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया।
श्रद्धा वाकर हत्याकांड देश के चर्चित मामलों में शामिल है। आरोप है कि आफताब पूनावाला ने अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वाकर की हत्या कर उसके शव के टुकड़े कर दिए थे। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए थे, जिनमें डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी प्रमाण शामिल हैं।
मामले की सुनवाई में तेजी लाने के लिए कोर्ट ने 21 जुलाई से 27 जुलाई तक लगातार सुनवाई करने का फैसला लिया है। मंगलवार को अभियोजन पक्ष के गवाह डीएनए विशेषज्ञ वीआर गिरनार का मुख्य बयान दर्ज किया गया था। इसके बाद बुधवार को एटीओ मधु विहार में तैनात इंस्पेक्टर संदीप कुमार अदालत में पेश हुए।
मामले में पुलिस अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि, सब-इंस्पेक्टर अंकित का बयान दर्ज नहीं हो सका क्योंकि उन्हें एक अन्य मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश मिला था। अब इंस्पेक्टर संदीप कुमार के बयान पर जिरह 27 जुलाई को होगी।
इसके अलावा मामले में डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही कराने को लेकर भी आवेदन दिया गया है। वाट्सऐप के नोडल अधिकारी एड्रियन सिल्वेरा, गूगल की शेल्बी स्मिथ, जीमेल प्रतिनिधि आरती सेठ और बंबल के ल्यूक मित्सी की ओर से बयान दर्ज कराने की अनुमति मांगी गई है।
बचाव पक्ष ने इन अर्जियों पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने बचाव पक्ष को दो दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि गंभीर अपराधों के आरोपितों को भी कानून के तहत निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी अधिकार प्राप्त होते हैं। अदालत ने अपने आदेश में न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए फैसला सुनाया है।