नई दिल्ली। जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर और राष्ट्रीय राजधानी के बाहर विभिन्न स्थानों पर हुई हिंसा की घटनाओं की जांच के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति (HPEC) ने शनिवार, 17 अक्टूबर को एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित इस समिति का उद्देश्य हिंसा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करना और प्रभावित लोगों की शिकायतों को दर्ज करना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने जानकारी दी कि नए पोर्टल के माध्यम से हिंसा से प्रभावित नागरिक, पुलिसकर्मी और अन्य संबंधित पक्ष अपनी शिकायतें, बयान, दस्तावेज तथा महत्वपूर्ण जानकारियां समिति तक पहुंचा सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की समिति ने शुरू किया विशेष पोर्टल
गृह मंत्रालय के अनुसार, उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति ने प्रभावित लोगों की सुविधा के लिए [hpec.nic.in](http://hpec.nic.in?utm_source=chatgpt.com) पोर्टल शुरू किया है। इसका उद्देश्य जुलाई में हुई हिंसक घटनाओं से जुड़े पीड़ितों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को अपनी बात रखने का एक मंच उपलब्ध कराना है।इस पोर्टल के जरिए लोग निर्धारित प्रारूप में अपनी शिकायतें और प्रतिवेदन अपलोड कर सकते हैं। जिन लोगों के पास घटनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी या सुझाव हैं, वे भी अपनी बात समिति तक पहुंचा सकते हैं।समिति जुलाई 2026 में जंतर-मंतर और दिल्ली के बाहर हुई हिंसा के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। इसमें प्रभावित नागरिकों के साथ उन पुलिसकर्मियों की शिकायतें भी शामिल होंगी, जो इन घटनाओं से प्रभावित हुए थे।
गवाहों की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था
गृह मंत्रालय ने बताया कि पोर्टल को विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके। यदि कोई प्रभावित व्यक्ति अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता है, तो उसकी पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान किया गया है।यह व्यवस्था उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो किसी घटना के संबंध में जानकारी देना चाहते हैं, लेकिन अपनी पहचान उजागर होने को लेकर चिंतित हैं।मंत्रालय के अनुसार, समिति का प्रयास है कि संबंधित लोग बिना अनावश्यक दबाव के अपनी शिकायतें और जानकारी प्रस्तुत कर सकें। पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों और सूचनाओं का उपयोग समिति अपनी जांच के दौरान कर सकेगी।
पेलेट गन और महिला प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता
गृह मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, जांच समिति कुछ विशेष मुद्दों को प्राथमिकता देगी। इनमें हिंसा के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित हिंसा और उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं।इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों या दूसरे पक्ष की ओर से कथित अत्यधिक हिंसा तथा सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान से संबंधित घटनाओं की भी जांच की जाएगी।समिति सर्वोच्च न्यायालय के 18 अगस्त 2026 और 10 सितंबर 2026 के आदेशों में निर्धारित विषयों की जांच करेगी। इन आदेशों के तहत समिति को हिंसा से जुड़े संबंधित पहलुओं की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऑनलाइन के अलावा ऑफलाइन भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए केवल ऑनलाइन पोर्टल पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। प्रभावित व्यक्ति और अन्य संबंधित पक्ष समिति के कार्यालय में जाकर भी शिकायत, प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेज जमा कर सकते हैंइसके लिए उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति का कार्यालय शिक्षा सदन, 17, राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली-110002 में स्थित है।कार्यालय में सभी कार्यदिवसों पर दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक शिकायतें और संबंधित सामग्री जमा की जा सकती हैं। इसके अलावा, डाक और ईमेल के माध्यम से भी जानकारी भेजने की सुविधा उपलब्ध है।
हिंसा से जुड़े सभी पक्षों की जानकारी जुटाएगी समिति
उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति का उद्देश्य जुलाई 2026 की घटनाओं से संबंधित उपलब्ध शिकायतों, बयानों और अन्य सामग्री का परीक्षण करना है। समिति के सामने प्रभावित लोगों के साथ पुलिसकर्मी तथा अन्य संबंधित पक्ष भी अपनी बात रख सकेंगे।गृह मंत्रालय ने लोगों से आग्रह किया है कि वे पोर्टल पर उपलब्ध निर्धारित प्रारूप का इस्तेमाल करके अपनी शिकायतें और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जमा करें।इस पहल से जांच समिति को घटनाओं के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, शिकायत दर्ज होना अपने आप में किसी आरोप के सही साबित होने का प्रमाण नहीं है। समिति उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर मामलों का परीक्षण करेगी।फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित HPEC ने शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध कराए हैं। इससे जुलाई में हुई हिंसा से प्रभावित लोगों को अपनी बात जांच समिति तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।