दिल्ली : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी गठबंधन के नेताओं के विरोध प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने दिल्ली में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का डेटा जारी किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, एसआईआर 2026 के तहत दिल्ली की मतदाता सूची में करीब 33 लाख ऐसी एंट्री मिली थीं, जिनमें तार्किक गड़बड़ी है या उनका मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पा रहा है। यह आंकड़ा सूची में दर्ज एंट्री से संबंधित है। इसे अपने आप फर्जी मतदाताओं या सूची से हटाए गए नामों की संख्या नहीं माना जा सकता।
सामने आई जानकारी में इन एंट्री को दो तरह की समस्याओं से जोड़ा गया है। पहली स्थिति तार्किक गड़बड़ी की है और दूसरी मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की। हालांकि, इन दोनों श्रेणियों में अलग-अलग कितनी एंट्री हैं, इसका ब्योरा उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है। इसलिए करीब 33 लाख का आंकड़ा दोनों स्थितियों के संयुक्त संदर्भ में सामने आया है। किसी एक श्रेणी को पूरी संख्या का आधार बताना सही नहीं होगा।
यह डेटा ऐसे समय जारी हुआ है, जब विपक्षी गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची से संबंधित जानकारी सामने आने का समय एक है, लेकिन उपलब्ध विवरण में डेटा जारी करने के उद्देश्य पर कोई अलग बयान शामिल नहीं है। इसलिए इसे आयोग की ओर से विपक्ष को दिया गया जवाब या किसी राजनीतिक दावे का अंतिम खंडन बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल तथ्य यही है कि प्रदर्शन के बीच दिल्ली का एसआईआर डेटा जारी किया गया।
मतदाता सूची में दर्ज एंट्री और किसी व्यक्ति की पात्रता को अलग-अलग समझना आवश्यक है। रिकॉर्ड में तार्किक गड़बड़ी मिलने या उसका मिलान नहीं हो पाने से संबंधित व्यक्ति के बारे में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता। साझा जानकारी में ऐसी एंट्री मिलने की बात कही गई है, लेकिन उन पर हुई अंतिम कार्रवाई का विवरण नहीं है। इसलिए करीब 33 लाख लोगों को अपात्र, फर्जी या मतदान के अधिकार से वंचित घोषित किए जाने का दावा इस डेटा के आधार पर नहीं किया जा सकता।
मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पाने का उल्लेख भी इस आंकड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका अर्थ यहां इतना है कि संबंधित एंट्री का उपलब्ध रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो पा रहा है। किन रिकॉर्ड के साथ तुलना की गई और मिलान में किस प्रकार का अंतर मिला, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। इसी तरह तार्किक गड़बड़ी की परिभाषा या उसके उदाहरण भी नहीं दिए गए हैं। बिना इन विवरणों के समस्या की प्रकृति के बारे में अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।
करीब 33 लाख एंट्री का आंकड़ा बड़ा है, लेकिन उसके अनुपात को समझने के लिए दिल्ली की संबंधित मतदाता सूची की कुल संख्या भी जरूरी होगी। उपलब्ध सामग्री में कुल एंट्री या कुल मतदाताओं का आंकड़ा शामिल नहीं है। इसलिए यह बताना संभव नहीं है कि सामने आई संख्या पूरी सूची का कितना प्रतिशत है। किसी अनुमानित कुल संख्या से तुलना करके प्रतिशत निकालना खबर में अपुष्ट जानकारी जोड़ देगा। फिलहाल आंकड़े को उसकी बताई गई सीमा में ही रखा जाना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी का संबंध एसआईआर 2026 से है। हालांकि, डेटा किस तारीख तक की स्थिति दर्शाता है, इसकी अलग समयसीमा साझा विवरण में नहीं दी गई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सूची की जांच का कौन सा चरण पूरा होने के बाद संख्या सामने आई। ऐसे में इसे अंतिम मतदाता सूची का निष्कर्ष या सभी संबंधित मामलों की जांच पूरी होने का प्रमाण नहीं कहा जा सकता। जारी आंकड़े की स्थिति समझने के लिए विस्तृत आधिकारिक ब्योरा आवश्यक है।
इन एंट्री पर सुधार, सत्यापन या नाम हटाने से संबंधित कितनी कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। किसी मतदाता को नोटिस भेजे जाने, जवाब मांगे जाने या रिकॉर्ड ठीक किए जाने का अलग आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए चिह्नित एंट्री और निस्तारित मामलों की संख्या को एक नहीं माना जाना चाहिए। सूची में समस्या सामने आने की जानकारी है, जबकि उसके बाद की कार्रवाई और अंतिम परिणाम का विवरण साझा सामग्री में शामिल नहीं है।
विरोध प्रदर्शन के बीच जारी डेटा पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया भी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग का उल्लेख है, लेकिन करीब 33 लाख एंट्री वाले आंकड़े पर किसी नेता का बयान शामिल नहीं है। इसी तरह आयोग की ओर से इस संख्या को राजनीतिक आरोपों से जोड़ते हुए कोई विस्तृत टिप्पणी सामने नहीं रखी गई है। इसलिए दोनों पक्षों के नाम पर अतिरिक्त बयान या दावे लिखना उचित नहीं होगा।
दिल्ली के एसआईआर 2026 से जुड़ी इस जानकारी में मुख्य बात करीब 33 लाख एंट्री में तार्किक गड़बड़ी या मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की है। चुनाव आयोग ने विपक्षी प्रदर्शन के बीच यह डेटा जारी किया है और जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली है। फिलहाल इन एंट्री की श्रेणीवार संख्या, सत्यापन की स्थिति और अंतिम कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध नहीं है। इसलिए आंकड़े को सूची में सामने आई विसंगतियों के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। इसे फर्जी मतदाता, हटाए गए नाम या सिद्ध चुनावी गड़बड़ी की संख्या बताने का आधार अभी नहीं है।