नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई। त्योहारी सीजन में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताने वाले व्यापारियों को अदालत से फिलहाल कोई तत्काल राहत नहीं मिली। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस मामले में तुरंत कोई निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान आम लोगों और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए।सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि इस मामले से जुड़े सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे। अदालत ने व्यापारियों की परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि त्योहारी सीजन में छोटे दुकानदारों की कमाई पर असर पड़ने से उनके परिवारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई दशहरा की छुट्टियों के बाद 26 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी पक्ष समझदारी से काम लें
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन तथा सेंट्रल पार्क को बंद किए जाने का मामला उठाया गया।सुनवाई के दौरान अदालत ने तत्काल आदेश देने से इनकार करते हुए उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्ष विवेकपूर्ण निर्णय लेंगे।मुख्य न्यायाधीश ने छोटे दुकानदारों की आजीविका को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान छोटे व्यापारी अपनी कमाई पर निर्भर रहते हैं और कारोबार प्रभावित होने पर उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
जस्टिस बागची ने उठाया रोजी-रोटी का मुद्दा
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने विरोध करने के अधिकार, कारोबार करने की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया।उन्होंने कहा कि कोई प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण व्यापारियों को गैरकानूनी तरीके से नुकसान पहुंचता है, तो उचित परिस्थितियों में मुआवजे के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया।
त्योहारी सीजन में नुकसान की आशंका से परेशान व्यापारी
कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में दुकानें, रेस्तरां, होटल और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थित हैं।त्योहारी सीजन के दौरान यहां खरीदारी करने वालों की भीड़ रहती है। ऐसे में व्यापारियों को आशंका है कि विरोध-प्रदर्शनों, यातायात प्रतिबंधों और सुरक्षा व्यवस्था के चलते ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।व्यापारियों ने अदालत के सामने अपनी आजीविका और आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इस समय कारोबार में रुकावट आने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
सेंट्रल पार्क दो दिनों के लिए बंद
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया है।यह निर्णय CJP के प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' कार्यक्रम के मद्देनजर लिया गया है। कार्यक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है।पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए आसपास के इलाकों में यातायात प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी उपाय लागू किए हैं।
CJP ने किया था तिरंगा मार्च का ऐलान
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च आयोजित करने का आह्वान किया था।यह प्रदर्शन चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई के विरोध में प्रस्तावित किया गया था।कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारी पक्ष के बीच मतभेद सामने आए हैं। एक तरफ CJP शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की बात कर रही है, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षाको प्राथमिकता देने की बात कह रहा है।
अब 26 अक्टूबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए इसे दशहरा की छुट्टियों के बाद सुनवाई के लिए रखने की बात कही है।अदालत ने स्पष्ट किया कि विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार के साथ आम नागरिकों और व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।फिलहाल सेंट्रल पार्क को बंद रखने का प्रशासनिक आदेश प्रभावी है। अब 26 अक्टूबर को प्रस्तावित सुनवाई में व्यापारियों की चिंताओं, प्रशासनिक प्रतिबंधों और विरोध-प्रदर्शन से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे विचार किया जा सकता है।
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