जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-NC के बीच बढ़ी तकरार, विकार रसूल ने उठाए सवाल
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस के बीच जारी खींचतान एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विकार रसूल वानी ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने उमर सरकार को सभी मोर्चों पर पूरी तरह विफल बताते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन जारी रखने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। वानी का कहना है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को NC सरकार का समर्थन करने से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला है। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से दूर रखने की राजनीतिक रणनीति के कारण गठबंधन का समर्थन जारी रखने की बात कही जा रही है।यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। पार्टी के कई विधायक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के कामकाज, मंत्रियों के प्रदर्शन और संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर उठती आवाजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।
उमर सरकार को बताया पूरी तरह विफल
विकार रसूल वानी ने उमर अब्दुल्ला सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने में सफल नहीं रही है। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के बावजूद कांग्रेस के नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को कोई खास राजनीतिक फायदा नहीं मिला।वानी ने कांग्रेस और NC के बीच गठबंधन को पार्टी की बड़ी राजनीतिक गलती तक बताया। उनका कहना है कि गठबंधन के कारण कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की राजनीतिक जमीन कमजोर हुई है और पार्टी को अपने संगठनात्मक हितों की कीमत चुकानी पड़ी है।25 मई 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट में वानी ने कहा था कि NC सरकार को समर्थन देने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से गठबंधन की समीक्षा करने और भविष्य की रणनीति पर दोबारा विचार करने की अपील की थी।
BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन का आधार BJP को सत्ता से दूर रखना रहा है। अक्टूबर 2025 में राज्यसभा चुनाव के दौरान भी कांग्रेस ने अपने विधायकों से NC उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने को कहा था।तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने NC अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला को लिखे पत्र में कहा था कि पार्टी BJP को सत्ता से दूर रखने के अपने सिद्धांत के तहत नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया था कि गठबंधन के पिछले एक साल का अनुभव निराशाजनक रहा है और कांग्रेस नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला।इसके बावजूद कांग्रेस ने व्यापक राजनीतिक उद्देश्य और BJP के खिलाफ एकजुटता को प्राथमिकता देने का फैसला किया था। इस रुख ने पार्टी के भीतर गठबंधन के समर्थन और विरोध के बीच मतभेद को भी उजागर किया।
कांग्रेस के भीतर बढ़ रही गठबंधन की समीक्षा की मांग
कांग्रेस में NC के साथ गठबंधन को लेकर असहमति नई नहीं है। विकार रसूल वानी लगातार इस साझेदारी की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की भावना के अनुरूप व्यवहार नहीं किया।उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान भी NC पर BJP के साथ कथित समझौते का आरोप लगाया था। वानी ने कांग्रेस हाईकमान से गठबंधन समाप्त करने पर विचार करने की मांग की थी। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व ने समय-समय पर उनके बयानों को व्यक्तिगत विचार बताते हुए पार्टी की आधिकारिक रणनीति से अलग रखा है।वानी का कहना है कि गठबंधन में कांग्रेस को न तो पर्याप्त राजनीतिक महत्व मिल रहा है और न ही उसके कार्यकर्ताओं को अपेक्षित अवसर। उनका मानना है कि पार्टी को अपने संगठन और राजनीतिक भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।
NC के भीतर भी उमर अब्दुल्ला के खिलाफ असंतोष
कांग्रेस के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। 30 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर में पार्टी के असंतुष्ट विधायकों की एक बैठक हुई थी। इसमें करीब दो दर्जन विधायकों के शामिल होने की खबर सामने आई। विधायकों ने सरकार और संगठन के कामकाज में सुधार की मांग उठाई।रिपोर्टों के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों ने मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा, मंत्रिमंडल में बदलाव और मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाने की मांग की। विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से निर्णय लेने की प्रक्रिया में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने को भी कहा।द वायर की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 25 विधायक कैबिनेट में व्यापक बदलाव की मांग का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, 6 नवंबर को NDTV की रिपोर्ट में कम से कम 18 विधायकों के असंतोष और संगठनात्मक सुधारों की मांग का उल्लेख किया गया।
कांग्रेस और NC के सामने राजनीतिक चुनौती
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच गठबंधन को लेकर जारी विवाद दोनों दलों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। कांग्रेस के सामने जहां अपने कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने की चुनौती है, वहीं NC को सरकार और पार्टी के भीतर उठ रहे असंतोष का समाधान करना है।उमर अब्दुल्ला सरकार का बचाव करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने पहले भी कहा है कि जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश है और निर्वाचित सरकार के पास कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकार सीमित हैं। पार्टी का तर्क है कि केंद्र और उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र के कारण कई चुनावी वादों को लागू करने में कठिनाइयां आती हैं।द वायर की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में भी NC के बचाव पक्ष का उल्लेख है। पार्टी का कहना है कि सरकार के पास अभी कार्यकाल का समय शेष है और वह अपने घोषणापत्र के वादों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है।
गठबंधन की मजबूरी या राजनीतिक रणनीति?
विकार रसूल वानी की आलोचना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन को राजनीतिक जरूरत मानती है या मजबूरी। एक तरफ कांग्रेस नेतृत्व BJP को सत्ता से दूर रखने और विपक्षी एकजुटता बनाए रखने की बात करता रहा है, तो दूसरी तरफ पार्टी के कुछ नेता NC सरकार के प्रदर्शन और गठबंधन से मिलने वाले लाभ पर सवाल उठा रहे हैं।वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर भी विधायकों की नाराजगी सरकार के लिए चुनौती बन रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल कांग्रेस-NC गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों और पार्टी के भीतर असंतोष ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।समर्थन देने का आधिकारिक कांग्रेस रुख अक्टूबर 2025 के राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में तारिक हमीद कर्रा ने व्यक्त किया था।