नई दिल्ली : संसदीय व्यवस्था की गरिमा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने के उद्देश्य से नई दिल्ली में राज्यसभा के नवनिर्वाचित और मनोनीत सदस्यों के लिए दो दिवसीय विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम 'प्रारंभ' का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने किया।
इस अवसर पर सभापति ने नए सदस्यों को संसदीय प्रक्रियाओं, जनसेवा के उच्च आदर्शों और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग को लेकर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश की नीतियों, लोकतांत्रिक परंपराओं और विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी और सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र में नए सदस्यों को संसद की कार्यप्रणाली और उनके संवैधानिक दायित्वों से अवगत कराया गया।
'अमृत काल' में सांसदों की भूमिका महत्वपूर्ण: हरिवंश
कार्यक्रम की शुरुआत उपसभापति हरिवंश के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने नए सदस्यों का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनका राज्यसभा में प्रवेश देश के 'अमृत काल' के महत्वपूर्ण दौर में हुआ है। उन्होंने कहा कि नए सांसदों के पास 'विकसित भारत @2047' के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान देने का अवसर है।
हरिवंश ने कहा कि राज्यसभा के सदस्य सरकार से सवाल पूछने, जनहित के मुद्दों को उठाने, नीतियों पर चर्चा करने और विधेयकों पर रचनात्मक सुझाव देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे अपने अधिकारों का उपयोग राष्ट्रहित और जनकल्याण के लिए करें।
उन्होंने कहा कि संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने रखने का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच भी है। ऐसे में सांसदों को गंभीरता, अध्ययन और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
संसदीय परंपराओं और तकनीक के उपयोग पर जोर
ओरिएंटेशन कार्यक्रम में नए सदस्यों को संसदीय नियमों, प्रक्रियाओं और सदन की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही डिजिटल तकनीक के उपयोग, संसदीय संसाधनों और प्रभावी जनप्रतिनिधित्व के तरीकों पर भी चर्चा की जा रही है।
कार्यक्रम का उद्देश्य नए सदस्यों को सदन की कार्यवाही को बेहतर ढंग से समझने और अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी तरीके से निभाने के लिए तैयार करना है। इसमें विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा की जा रही है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नए सांसदों से कहा कि वे संसदीय मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने जनसेवा को सांसदों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ सदन तक पहुंचाया है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाना चाहिए।
दो दिवसीय 'प्रारंभ' कार्यक्रम के माध्यम से नए राज्यसभा सदस्यों को संसद की परंपराओं, नियमों और जिम्मेदारियों से परिचित कराया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह पहल नए सदस्यों को प्रभावी संसदीय भूमिका निभाने में मददगार साबित होगी।