नई दिल्ली । केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार दोपहर करीब दो बजे एक बौद्ध धार्मिक स्थल पहुंचकर भगवान बुद्ध की पूजा-वंदना की। इस दौरान उन्होंने धार्मिक स्थल की परिक्रमा की और परिसर में स्थित जर्जर संरचनाओं का निरीक्षण किया। केंद्रीय मंत्री के दौरे के दौरान धार्मिक स्थल के संरक्षण और रखरखाव का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। आयोजक सुरेश बौद्ध ने मंत्री को परिसर की खराब होती स्थिति से अवगत कराते हुए पुरातत्व विभाग की कथित उदासीनता पर सवाल उठाए।
सुरेश बौद्ध ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले इस स्थल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग की ओर से समय पर संरक्षण और रखरखाव का कार्य नहीं किए जाने के कारण धार्मिक स्थल के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। इससे बौद्ध अनुयायियों और स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ रही है।
भगवान बुद्ध की पूजा-वंदना के बाद किया स्थल का निरीक्षण
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू मंगलवार दोपहर करीब दो बजे बौद्ध धार्मिक स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान बुद्ध की पूजा-वंदना कर श्रद्धा प्रकट की। इसके बाद धार्मिक स्थल पर बने परिक्रमा पथ से परिसर का भ्रमण किया।
परिक्रमा के दौरान उन्होंने धार्मिक स्थल की मौजूदा स्थिति देखी। आयोजक सुरेश बौद्ध ने उन्हें उन हिस्सों के बारे में जानकारी दी, जिनकी हालत खराब हो रही है। उन्होंने बताया कि समय रहते आवश्यक संरक्षण कार्य नहीं किए गए तो धार्मिक स्थल को और अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका है।
इस दौरे के दौरान धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा का विषय भी चर्चा में रहा। आयोजकों ने स्थल के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
सुरेश बौद्ध ने पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
आयोजक सुरेश बौद्ध ने केंद्रीय मंत्री के सामने पुरातत्व विभाग की कथित लापरवाही का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि संरक्षण के अभाव में धार्मिक स्थल की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि महत्वपूर्ण धार्मिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए समय पर प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने मंत्री को बताया कि धार्मिक स्थल का महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बौद्ध समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे स्थानों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और संस्कृति से परिचित कराने के लिए आवश्यक है।
हालांकि, पुरातत्व विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित स्थल के संरक्षण के लिए पहले कौन-कौन से कार्य किए गए हैं और वर्तमान में किसी मरम्मत या जीर्णोद्धार परियोजना को स्वीकृति मिली है या नहीं।
ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए संरक्षण जरूरी
भारत में बौद्ध धर्म से जुड़े धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का विशेष महत्व है। भगवान बुद्ध की शिक्षाओं, उनके जीवन और बौद्ध परंपराओं से जुड़े ये स्थल देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।
ऐसे स्थलों का संरक्षण केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि पुरातात्विक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी आवश्यक है। पुरानी संरचनाओं में समय के साथ प्राकृतिक क्षरण, मौसम का प्रभाव और रखरखाव की कमी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत सामान्य निर्माण कार्यों से अलग होती है। इनमें पुरानी निर्माण सामग्री, वास्तुकला और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। बिना वैज्ञानिक अध्ययन के किए गए मरम्मत कार्य कई बार मूल संरचना को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।
ऐसे में किसी भी प्राचीन धार्मिक स्थल के संरक्षण के लिए संबंधित विशेषज्ञों से तकनीकी मूल्यांकन कराना महत्वपूर्ण माना जाता है।
बौद्ध समाज की आस्था से जुड़ा है धार्मिक स्थल
बौद्ध धार्मिक स्थल केवल उपासना के केंद्र नहीं होते, बल्कि भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, अहिंसा और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम भी हैं। इन स्थानों पर आने वाले श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान करने के साथ बौद्ध परंपराओं और इतिहास से जुड़ते हैं।
आयोजक सुरेश बौद्ध द्वारा केंद्रीय मंत्री के सामने उठाई गई समस्या ने धार्मिक स्थलों की देखरेख और संरक्षण से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।
किसी धार्मिक स्थल की जर्जर स्थिति का प्रभाव वहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। इसलिए भवनों और प्राचीन संरचनाओं की स्थिति का नियमित आकलन आवश्यक है।
यदि किसी परिसर में दीवारों, छतों या अन्य संरचनाओं के कमजोर होने की आशंका हो, तो सुरक्षा की दृष्टि से उनका तकनीकी निरीक्षण कराया जाना चाहिए।
बौद्ध विरासत के संरक्षण पर केंद्र सरकार का जोर
केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से देश की बौद्ध विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन पर जोर देती रही है। पर्यटन सुविधाओं में सुधार, ऐतिहासिक स्थलों का विकास और बौद्ध संस्कृति को बढ़ावा देना इन प्रयासों का हिस्सा है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू भी पूर्व में बौद्ध विरासत के संरक्षण के महत्व को रेखांकित कर चुके हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के एक कार्यक्रम में उन्होंने भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
हालांकि, मंगलवार के इस विशेष दौरे के दौरान धार्मिक स्थल के जीर्णोद्धार के संबंध में केंद्रीय मंत्री की ओर से किसी नई वित्तीय स्वीकृति या निश्चित कार्ययोजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब संरक्षण को लेकर ठोस कार्रवाई का इंतजार
केंद्रीय मंत्री के दौरे के बाद धार्मिक स्थल की खराब स्थिति और उसके संरक्षण की आवश्यकता का विषय प्रमुखता से सामने आया है। आयोजक सुरेश बौद्ध ने जिस तरह पुरातत्व विभाग की कथित उदासीनता की जानकारी दी, उससे संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि धार्मिक स्थल की वर्तमान स्थिति का तकनीकी परीक्षण कब किया जाएगा और आवश्यक मरम्मत एवं संरक्षण कार्य के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय तथा समयबद्ध संरक्षण कार्य जरूरी हैं। यदि स्थल की जर्जर संरचनाओं की समय रहते देखभाल नहीं की गई तो भविष्य में नुकसान बढ़ने का खतरा हो सकता है।
फिलहाल, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के इस दौरे ने बौद्ध धार्मिक स्थल के संरक्षण की आवश्यकता को सामने ला दिया है। अब संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।