दिल्ली : संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध मंगलवार को भी खत्म नहीं हो सका। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया, जिसके कारण सदन का कामकाज बार-बार बाधित हुआ। पहले बैठक को दोपहर 2 बजे तक स्थगित किया गया और बाद में लगातार जारी नारेबाजी के चलते लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष की मांग थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब दें। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया और इस पूरे मामले पर सरकार को सदन में स्पष्ट बयान देना चाहिए।
मंगलवार सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। सदन में लगातार शोर-शराबा होता रहा, जिससे प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और जनता से जुड़े अनेक मुद्दों पर चर्चा का यही उपयुक्त मंच है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे सदन की कार्यवाही चलने दें और अपनी बात संसदीय नियमों के तहत रखें। हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने अपनी मांग पर अड़े रहते हुए नारेबाजी जारी रखी।
लगातार हंगामे के कारण अध्यक्ष को पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तब भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। विपक्ष ने फिर से गृह मंत्री के बयान की मांग दोहराई और नारेबाजी जारी रखी। आखिरकार कार्यवाही को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
संसद का मौजूदा मानसून सत्र शुरुआत से ही विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष लगातार कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है। इनमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई, विभिन्न भर्ती और परीक्षा से जुड़े विवाद तथा अन्य जनहित के मुद्दे प्रमुख हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन गंभीर मामलों पर चर्चा से बच रही है और जवाब देने से कतरा रही है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उनका कहना है कि इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह का सदन में उपस्थित होकर बयान देना आवश्यक है ताकि पूरे घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट हो सके। विपक्ष का यह भी कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ हुई कार्रवाई पर संसद में चर्चा होना जरूरी है।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि संसद में नियमों के तहत सभी विषयों पर चर्चा के लिए वह तैयार है, लेकिन सदन का लगातार बाधित होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है। सरकार का मानना है कि विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए संसदीय प्रक्रिया का पालन करना चाहिए ताकि महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी समय पर पूरे हो सकें।
इस बीच सोमवार को भी लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बावजूद एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026' को ध्वनिमत से लोकसभा की मंजूरी मिल गई। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में यह विधेयक पेश किया। उस समय भी विपक्ष की ओर से लगातार नारेबाजी की जा रही थी।
सोमवार की कार्यवाही के दौरान अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने भी कई बार विपक्षी सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और यहां गंभीर विषयों पर चर्चा तथा विधायी कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके बावजूद विपक्ष का विरोध जारी रहा और शोर-शराबे के बीच ही विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
लगातार हो रहे हंगामे के कारण संसद के मानसून सत्र की उत्पादकता पर भी सवाल उठने लगे हैं। कई महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पा रही है। संसदीय कार्यों में लगातार व्यवधान आने से विधायी एजेंडा भी प्रभावित हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो मानसून सत्र के शेष दिनों में भी इसी तरह की स्थिति बनी रह सकती है।
फिलहाल सभी की नजरें बुधवार की कार्यवाही पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि सरकार और विपक्ष के बीच किसी सहमति का रास्ता निकले ताकि संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चल सके और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।